कमीशनखोरी व भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय पाठक और उनके करीबी अजय मिश्रा के खिलाफ सीबीआई की टीम ने बृहस्पतिवार से विधिवत जांच शुरू कर दी। सीबीआई मुख्यालय से लखनऊ पहुंची टीम ने एसटीएफ से पाठक के खिलाफ अब तक की जांच से संबंधित दस्तावेज व केस डायरी अपने कब्जे में ले ली।
टीम ने एसटीएफ के अफसरों से मामले में अब तक की पूछताछ की जानकारियां हासिल कीं। सीबीआई मुख्यालय की एसी टू शाखा के अधिकारियों ने सबसे पहले एसटीएफ के एडीजी से मिलकर जांच शुरू करने की औपचारिकता पूरी की। इसके बाद एसटीएफ के अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव से साक्ष्यों पर चर्चा की। करीब दो घंटे तक पाठक व अजय से संबंधित जानकारी लेने के बाद टीम आगरा रवाना हो गई। एसटीएफ द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों में सबसे अधिक प्रो. पाठक के आगरा में तैनाती के दौरान के ही हैं। वहां भी पाठक के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई इंदिरानगर थाने में दर्ज एफआईआर के अलावा कई अन्य बिंदुओं पर भी जांच करेगी।
धरी रह गई एनबीडब्ल्यू की तैयारी
बार-बार बुलाने पर भी पाठक के न आने पर एसटीएफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी करवाना चाहती थी, ताकि रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की जा सके। इसी के लिए एसटीएफ ने मुकदमे में बढ़ाई गई धाराओं और पाठक के खिलाफ कमीशन के ट्रांजेक्शन से जुड़े साक्ष्य आदि के दस्तावेज तैयार करवा लिए थे।
फिर से याचिका की तैयारी में वादी
सूत्रों के मुताबिक विनय पाठक व अजय के खिलाफ इंदिरानगर थाने में केस दर्ज करवाने वाले डेविड मारियो डेनिस सीबीआई जांच के खिलाफ कोर्ट में फिर से याचिका दाखिल करने की तैयारी में हैं। दरअसल कोर्ट ने उनके फिर से याचिका दायर करने के विकल्प को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है। जिस आधार पर सीबीआई जांच के आदेश हुए हैं अगर वो उसे चुनौती देने से जुड़े तथ्य जुटा पाए तो फिर से याचिका दाखिल कर सकते हैं।