एक फार्मास्युटिकल कंपनी का 35 लाख रुपये बैग में रखकर मैनेजर जितेंद्र दिल्ली भागने की तैयारी कर चुका था। वह कंपनी के ट्रांसपोर्टनगर स्थित कार्यालय से रुपये लेकर निकल गया था। कंपनी के निदेशक की सूचना पर कृष्णानगर पुलिस ने केशरीखेड़ा रेलवे फाटक के पास से दबोचा है। कंपनी का मुख्य कार्यालय मुंबई के अंधेरी वेस्ट, शाहर इंडस्ट्रियल स्टेट वीरा देसाई मार्ग पर है। कपंनी के निदेशक रंजीत शर्मा की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक पकड़ा गया आरोपी केशरीखेड़ा का रहने वाला है।
कंपनी के निदेशक रंजीत शर्मा के मुताबिक उनके हर राज्य में कार्यालय हैं। यहां ट्रांसपोर्टनगर में उनकी ब्रांच है। मैनेजर जितेंद्र, डीलरों से मिलीभगत कर स्टाक में रखी दवाइयों को एक्सपायरी बताकर कंपनी के दस्तावेजों में हेरफेर करता था। इसके बाद कंपनी से रुपया ले लेता था। कंपनी को लगातार घाटा हो रहा था। इस कारण विभागीय जांच कराई गई। जांच में जितेंद्र की भूमिका संदिग्ध मिली। इस बीच जालसाजी की जानकारी कंपनी के एक स्टाफ से हुई। स्टाफ ने बताया कि जितेंद्र कंपनी से रविवार रात बैग में रुपये लेकर निकला है। उसे दिल्ली जाना है। इसकी सूचना पर मुंबई से लखनऊ आया। कृष्णानगर पुलिस को जानकारी दी। सुबह टीम ने उसे दबोचा।
एमडी के कहने पर करता था हेराफेरी
पुलिस की पूछताछ में जितेंद्र ने बताया कि यह हेरफेर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर की कहने पर करता था। पूछताछ में उसने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर का नाम बताया। उन्हीं के जरिए वह गलत बिल भी पास करा लेता था। इंस्पेक्टर कृष्णानगर विक्रम सिंह के मुताबिक कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है। कंपनी के कुछ और लोगों की भी भूमिका संदिग्ध है। जांच में जो भी तथ्य आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। कंपनी के निदेशक रंजीत शर्मा ने बताया कि जितेंद्र इसके पहले उनके गुजरात स्थित आफिस में मैनेजर था। वहां ठीक से काम करता था। तीन साल पहले वह लखनऊ आया। यहां उसने जालसाजी शुरू कर दी। तीन साल में करोड़ों रुपये का जितेंद्र ने गबन किया है। इसकी जांच की जा रही है।