गांधी जयंती पर दो पुस्तकों का विमोचन, न्याय, मानवीय गरिमा और सुशासन पर हुई चर्चा
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। गांधी जयंती के अवसर पर किताबखाना इल्म व दानिश की ओर से अकबर हॉल, मेहताब बाग में साहित्यिक एवं विद्वत सभा का आयोजन किया गया। इसमें नहजुल बलागा से संबंधित दो पुस्तकों ‘नहजुल बलागा और उर्दू शायर’ तथा ‘शासन के सार्वभौमिक सिद्धांत अहदनामा-ए-मालिक अश्तर, पत्र संख्या 53 की रोशनी में’ का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने नहजुल बलागा में वर्णित न्याय, स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा, सहिष्णुता और सुशासन के विचारों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस महान ग्रंथ के ज्ञान को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना सैयद कर्रार अली जाफरी की तिलावत से हुई। संचालन साहित्यकार एवं शायर प्रोफेसर अब्बास रजा नय्यर जलालपुरी ने किया। किताबखाना इल्म व दानिश के निदेशक मौलाना सैयद हैदर अब्बास रिजवी ने संस्था की शैक्षिक एवं प्रकाशन गतिविधियों की जानकारी दी।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली सीस्तानी के प्रतिनिधि मौलाना अशरफ अली गरवी ने संस्था की सेवाओं की सराहना करते हुए नहजुल बलागा से अधिक से अधिक परिचित होने पर जोर दिया। हौजा इल्मिया गुफरानमआब के निदेशक मौलाना सैयद रजा हैदर जैदी ने नहजुल बलागा के व्यापक ज्ञान और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। मौलाना साबिर अली इमरानी ने श्रद्धांजलि स्वरूप काव्य प्रस्तुत किया।
अध्यक्षता कर रहे मौलाना सैयद मुहम्मद जाबिर जौरासी ने संस्था की शैक्षिक और प्रकाशन सेवाओं की सराहना की। उन्होंने बुजुर्ग विद्वानों की विरासत और उनकी शैक्षिक सेवाओं को सामने लाने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर किताबखाना इल्म व दानिश के प्रकाशनों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्वान, साहित्यकार और फाजिल शामिल हुए। अंत में मौलाना सैयद हैदर अब्बास रिजवी ने सभी अतिथियों का आभार जताया। कार्यक्रम का समापन दुआ-ए-फरज के साथ हुआ।