नगर निगम बढ़ाएगा पैनल अधिवक्ताओं की फीस, संख्या भी करेगा कम
बढ़ोत्तरी के बाद दो गुना तक हो जाएगी फीस
सदन में आएगा प्रस्ताव
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। नगर निगम करीब 16 साल बाद पैनल में शामिल अधिवक्ताओं की फीस बढ़ाने वाला है। इसको लेकर 15 अप्रैल को होने वाली नगर निगम सदन की बैठक में प्रस्ताव भी लाया जा रहा है। जिसमें फीस को करीब दो गुना तक किया जा सकता है।
नगर निगम के पैनल में शामिल अधिक्ताओं की तादाद तो हाईकोर्ट से लेकर सिविल कोर्ट और जनसूचना तक करीब 280 हैं मगर इनमें काम बामुकिश्ल 50 को ही मिल पाता है। सबसे अधिक 211 पैनल अधिवक्ता हाईकोर्ट में हैं मगर यहां पर काम चुनिंदा दो चार को ही मिलता है। उसमें भी जो बड़े मुकदमें होते हैं उनमें पैरवी के लिए नगर निगम अलग से बड़े वकीलों को रखता है जिनको लाखों रुपये की फीस देनी पड़ती है। ऐसे में नगर निगम के पैनल में वकीलों की तादाद तो बहुत है मगर काम बहुत कम आते हैं। इसको लेकर एक बड़ी वजह यह भी मानी जाती है कि नगर निगम पैनल अधिवक्ताओं को फीस भी बहुत कम देता है। इस महंगाई के दौर में हाईकोर्ट के अधिवक्ता को एक केस का 5200 रुपये और निचली अदालत में केस पर 3500 रुपये फीस देता है। यह पूरी फीस भी तभी मिल पाती है जब केस का निर्णय हो जाता है । शनिवार को नगर निगम में महापौर और नगर आयुक्त ने विधि विभाग की समीक्षा भी की। जिसमें यह मामला भी आया पैनल में अधिवक्ताओं की तादाद ज्यादा है। ऐसे में जो काम के हैं उनको ही रखा जाए। बैठक में इस पर भी बात हुई कि पैनल अधिवक्ताओं की फीस बहुत कम है, इसे भी अब बढ़ाया जाए। इसको लेकर अब फीस बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव बनाया जा रहा है जिसे सदन में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। जानकारों ने बताया कि फीस कम होने के बाद भी पैनल अधिवक्ताओं की संख्या इसलिए ज्यादा है क्योंकि यहां पर थोड़ी सी सिफारिश से पैनल में जगह मिल जाती और फिर प्रोफाइल वजनदार हो जाता है।