बांग्लादेशियों की पहचान को महापौर ने रामकी के कर्मचारियों के देखे पहचान पत्र
नहीं मिला कोई बांग्लादेशी
कांग्रेस पार्षद ने बताया सियासी ड्रामा
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या व्यक्तियों की पहचान को लेकर मंगलवार सुबह महापौर सुषमा खर्कवाल ने गोमती नगर इलाके में लखनऊ स्वच्छता अभियान (रामकी) के कर्मचारियों की जांच की। इस दौरान उनको वहां पर कोई बांग्लादशी नहीं मिला।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने मंगलवार सुबह के गोमती नगर विनीत खंड छह स्थित पोर्टेबल कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन का निरीक्षण किया।
यहां तैनात सफाई कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच की। इनमें विशेष रूप से उन लोगों के कागजात देखे जिन्होंने खुद को असम का बताया है। इस दौरान रामकी के प्रोजेक्ट हेड अभय रंजन भी मौजूद रहे। इस मौके पर महापौर ने निर्देश दिए कि किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति बिना पहचान पत्र और पूर्ण दस्तावेजों की जांच किए न करें। सभी सफाई कर्मचारियों, हेल्परों और अन्य स्टाफ का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। निरीक्षण के दौरान भाजपा पार्षद संजय सिंह राठौर,अरुण राय, पृथ्वी गुप्ता और जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।
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कांग्रेस पार्षद ने कहा महापौर कर रहीं सियासी ड्रामा
कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने महापौर पर सियासी ड्रामा करने का आरोप लगाया है। कहा कि शहरवासियों ने उन्हें महापोर चुना है न कि गृहमंत्री । बेहतर हो कि वह शहर की समस्याओं पर ध्यान दें न कि भाजपा के एजेंडे पर। नागरिकता की जांच करने की जगह उनको नागरिकों की सेवा करनी चाहिए। शहर को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का केंद्र बनाइए। यदि महापौर सही में बांग्लादेशी और रोहिंग्या को लेकर गंभीर हैं तो वो इसे लेकर गृह मंत्रालय भारत सरकार और राज्य सरकार को पत्र क्यों नहीं लिखतीं?
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