पांच लाख आबादी को पानी देने वाली कठौता झील की सफाई का काम फिर शुरू
मई में शारदा नहर बंद होने से काम भी हो गया था बंद
सफाई में निकलने वाली सिल्ट व मिट्टी मनोरथा गौशाला में की जाएगी उपयोग
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। करीब दो महीने बाद कठौता झील की सफाई का काम फिर शुरू हो गया है। सफाई में निकलने वाली सिल्ट व मिट्टी का अयोध्या रोड पर बन रही मनोरथा गौशाला की जमीन पटाई में उपयोग किया जाएगा। इसको लेकर जलकल महाप्रबंधक की ओर से सफाई का काम कर रही कार्यदायी संस्था जल निगम को आदेश जारी कर दिया गया है।
बीती अप्रैल माह में कठौत झील की सफाई का काम शुरू हुआ था लेकिन इसे मई के पहले सप्ताह में शारदा सहायक नहर बंद होने के कारण रोक दिया गया था क्योंकि झील को पानी शारदा सहायक नदी से ही मिलता है। यदि सफाई का काम नहीं रोका जाता तो तीसरे जलकल से इंदिरा और गोमती नगर की करीब पांच लाख आबादी किए जाने वाले पानी की आपूर्ति में समस्या होती क्योंकि जब नहर बंद होती है तब झील में स्टोर पानी से ही काम चलाया जाता है। करीब 20दिन पहले नहर शुरू हो गई है ऐसे में झील की सफाई का काम फिर से शुरू कर दिया गया है। सफाई में निकली वाली सिल्टी व मिट्टी को अयोध्या रोड पर बन रही मनोरथा गौशाला में डाला जा जाएगा।
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यह होगा फायदा
झील में करीब 6.50 लाख क्यूबिक मीटर बालू - मिट्टी जमा हो गई है। ऐसे में झील में पानी कम जमा हो पा रहा है। झील में जिस शारदा सहायक नहर से पानी आता है वह साल में दोबारा मरम्मत के लिए एक-एक महीने के लिए बंद की जाती है। उस दौरान झील में जमा पानी से ही इंदिरा और गोमती नगर को पानी की आपूर्ति की जाती है। झील में अधिकतम उतना ही पानी जमा होता है जिससे इंदिरा और गोमती नगर को करीब 28 दिन तक आपूर्ति की जा सकती है लेकिन झील में बालू जमा होने से कम पानी जमा हो पाता है। जिसको लेकर झील की सफाई की जा रही है। इस पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सफाई होने के बाद झील में अधिक पानी जमा होगा।
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कोट
झील की सफाई का काम फिर से शुरू कर दिया गया है। झील साफ होने से उसमें अधिक पानी जमा होगा। जिससे नहर बंद होने दौरान पेयजल आपूर्ति में समस्या नहीं आएगी। झील से निकलने वाली मिट्टी को मनोरथा गौशाला में डाला जाएगा।
कुलदीप सिंह, महाप्रबंधक जलकल