एक किमी के दायरे में पोल लगे स्ट्रीट लाइटें नहीं, रात में आवागमन में परेशानी
गोल चौराहा से कपूरथला चौराहा तक मंदिर मार्ग अंधेरे में
सीएम ग्रिड योजना में चल रहे काम में लापरवाही से मुसीबत
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। सीएम ग्रिड योजना में महानगर से कपूरथला चौराहा तक करीब एक किमी के दायरे में सड़क तो चलने लायक बना दी गई है मगर उस पर रात में अंधेरा रहता है। ऐसे में भारी ट्रैफिक वाली इस रोड पर राहगीरों को खतरा रहता है। रोड पर पोल तो डिवाइडर के बीच दो महीने से लगे हैं मगर उन पर लाइटें अब तक नहीं लगाई गई हैं।
सीएम ग्रिड योजना के तहत महानगर गोल चौराहा से कपूरथला तक की सड़क पर करीब छह महीने से काम चल रहा है। जिसमें सबसे पहले सड़क के बीच बने डिवाइडर को तोड़ा गया था। जिसमें वहां पर लगे स्ट्रीट लाइट के पोल भी हटाए गए थे। डिवाइडर बनने के बाद स्ट्रीट लाइट के पोल तो लगा दिए मगर उन पर लाइटें नहीं लगाई गईं। जिससे इस सड़क से गुजरने वालों को को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात में दुर्घटना होने का भी खतरा बना रहता है। इसको लेकर करीब दो महीने पहले अमर उजाला ने खबर भी प्रमुखता से प्रकाशित की थी। जिसके बाद नगर निगम की ओर से सड़क के दोनों किनारों पर लगे बिजली के पोलों पर कुछ स्ट्रीट लाइटें लगाईं मगर ज्यादातर पर नहीं लगाई है।
-------
छन्नीलाल चौराहा से कपूरथला तक एक भी लाइट नहीं
महानगर गोल चौराहा से मंदिर मार्ग की ओर चलने पर करीब एक किमी के दायरे में महज आठ से दस लाइटें ही एक ओर की पट्टी पर लगी हैं। दूसरी पट्टी पर नहीं लगी हैं। ऐसे में गोल चौराहा से छन्नी लाल चौराहा के पहले तक लगी इन लाइटों से समस्या दूर नहीं हुई। छन्नी लाल चौराहा से कपूरथला चौराहा तक सड़क के दोनों और एक भी लाइट नहीं लगाई गई है। ऐसे में अंधेरा रहता है। गाड़ियों की हेड लाइट से ही सड़क पर रोशनी दिखती है। पूर्व पार्षद शैलेंद्र सिंह बल्लू और सामाजिक कार्यकर्ता सुहैल अहमद ने कहा कि स्ट्रीट लाइटें न होने से लोगों को बहुत समस्या हो रही है। यह जिम्मेदार विभागों की लापरवाही को दर्शाता है। ---------
कोट
जहां पर काम चल रहा है वहां पर अस्थायी तौर पर लाइटें लगाने के निर्देश हैं ताकि रात में आवागमन में समस्या न हो। यदि कहीं पर लाइटें नहीं लगी हैं तो वह मार्ग प्रकाश विभाग से लगवाई जाएंगी।
ललित कुमार, अपर नगर आयुक्त