लखनऊ। केजीएमयू में अब पहले से बेहतर तरीके से ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हो सकेगी। न्यूरो सर्जरी विभाग में न्यूरो नेविगेशन मशीन लगने जा रही है। इसके लिए संस्थान को पांच करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। इस मशीन से ब्रेन ट्यूमर की दूरी व गहराई का सटीक आकलन हो सकेगा, जिससे सर्जरी में आसानी होगी।
केजीएमयू के मीडिया सेल फैकल्टी इंचार्ज प्रो. केके सिंह ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में बड़ी चुनौती उसकी गहराई व त्वचा से दूरी का अंदाजा लगाना होता है। न्यूरो नेविगेशन मशीन से पता लग जाएगा कि त्वचा के कितने अंदर से ट्यूमर की शुरुआत है और यह मस्तिष्क में कितनी गहराई तक है। ऐेसे में छोटा चीरा लगाकर ही ब्रेन की सर्जरी की जा सकेगी, नहीं तो बड़ा चीरा लगाकर पूरा ट्यूमर खोलना पड़ता है। मशीन इसकी भी जानकारी देगी कि ट्यूमर तक जाने के लिए सबसे छोटा रास्ता क्या है। यह भी पता चल जाएगा कि सर्जरी के दौरान कितना ट्यूमर निकाला जा चुका है। इससे सर्जरी की सुरक्षा और सटीकता बढ़ जाएगी।
ट्यूमर पहचानने में नहीं होगी चूक
कई बार गैर कैंसर वाले ट्यूमर मस्तिष्क की तरह नजर आते हैं। इस कारण सर्जन इन्हें पहचान नहीं पाते, जिससे सर्जरी के दौरान ट्यूमर के बजाय ब्रेन का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। न्यूरो नेविगेशन मशीन से ट्यूमर को पहचानने में चूक नहीं होगी।
...ऐसे काम करेगी मशीन
ब्रेन ट्यूमर के केस में एमआरआई के बाद उसे न्यूरो नेविगेशन सिस्टम पर अपलोड किया जाता है। मशीन ट्यूमर की पूरी जानकारी दे देती है। इसके बाद मरीज के ब्रेन की मैपिंग और सर्जरी की प्लानिंग अपलोड की जाती है। न्यूरो नेविगेशन मशीन से ट्यूमर के प्रकार, गहराई, दूरी, बचे ट्यूमर की जानकारी मिलती रहती है।