प्रवेंद्र गुप्ता
लखनऊ। सीवर सफाई के लिए स्मार्ट सिटी के बजट से खरीदी गईं 18 ग्रैब बकेट डिसिल्टिंग मशीनों को लेकर नगर निगम सवालों के घेरे में आ गया है। दो करोड़ से खरीदी गईं ये मशीनें सीवर की सफाई का काम करने वाली निजी कंपनी शुएज इंडिया को दी जाएंगी। इसके पहले भी तीन करोड़ रुपये की एक सुपर सकर मशीन कंपनी को दी गई थी। कंपनी को हर साल इसके लिए 77.50 करोड़ रुपये दिए जाते हैं।
वर्ष 2019 में शासन ने वन सिटी, वन ऑपरेटर योजना के तहत सीवर सिस्टम के मेंटेनेंस का काम जलकल विभाग से लेकर निजी कंपनी शुएज इंडिया को सौंप दिया था। इसके बाद से कंपनी ही शहर में सीवर की सफाई कर रही है। एसटीपी के संचालन का जिम्मा भी उसी के पास है। कंपनी को काम देते समय यह दावा किया गया था कि वह मशीनों के जरिये सफाई कराएगी और कर्मचारी भी अपने ही लगाएगी। इससे नगर निगम और जलकल विभाग को खर्च भी कम होगा। कंपनी का काम भी संतोषजनक नहीं रहा है। बहरहाल, नगर निगम के अपर नगर आयुक्त मंगलवार को ही खरीदी गईं मशीनें जलकल के महाप्रबंधक को सौंप चुके हैं।
जलकल कह रहा-कपंनी को देेंगे मशीनें, कंपनी कह रही-हमारे पास कोई कमी नहीं
जलकल महाप्रबंधक महेश चंद्र आजाद का कहना है कि मशीनों की खरीद के बारे मेंं वह ज्यादा नहीं जानते हैं लेकिन इन्हें चलाने के लिए शुएज कंपनी को दिया जाएगा। पहले भी एक सुपर सकर मशीन उनको दी गई। कुछ किराया कंपनी से ले लेंगे। वहीं, दूसरी ओर शुएज के परियोजना निदेशक राजेश मठपाल का कहना है कि कंपनी के पास मशीनोंं की कोई कमी नहीं है। जलकल वाले उनको जबरदस्ती मशीनें देने पर उतारू हैं।
जिम्मेदारों की गुगली
जलकल के प्रस्ताव पर खरीदी गईं मशीनें
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान का कहना है कि ये मशीनें जलकल विभाग के प्रस्ताव पर खरीदी गई हैं। इन मशीनोंं से सीवर के अलावा नालियों की भी सफाई कर सकते हैं।
-
जितनी मशीनें होंगी, काम उतना अच्छा होगा
मशीनोंं की खरीद में शामिल रहे जलकल सचिव राम कैलाश कहते हैं, जितनी मशीनें होंगी उतना अच्छा होगा। प्राइवेट कंपनी भले ही चलाए मगर मशीनें तो हमारी ही रहेंगी। कंपनी के पास छोटी मशीनों की कमी है।
-
मैंने तो सिर्फ हैंडओवर किया, क्यों खरीदी गईं ज्यादा जानकारी नहीं
अपर नगर आयुक्त अवनींद्र सिंह का कहना है कि मशीनों की खरीद का प्रस्ताव पहले का है। मैंने तो सिर्फ इनको जलकल को हैंडओवर किया है। सीवर सफाई का काम ठेेके पर होने के बाद भी मशीनों की खरीद क्यों की गई, इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
-
नगर निगम के गलियारों में कमीशनबाजी की चर्चा
मशीनों की खरीद पर जिम्मेदार भले ही गोलमोल जवाब दे रहे हों, पर नगर निगम के ही गलियारों में कमीशनबाजी को लेकर चर्चा जोरों पर है। दबी जुबान में अफसर-कर्मचारी कह रहे हैं कि कमीशनबाजी के ही फेर में निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि भले ही मशीनें जेम पोर्टल के जरिये खरीदी गई हों, पर ये महंगी हैं।