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कैसे बदलेगी छवि : जब जनता की सुनते नहीं बिजली अभियंता

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नरेश शर्मा
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लखनऊ। स्मार्ट बिजली मीटरों के तेज चलने के शिकायत दिल्ली तक पहुंची तो केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की टीम ने उपभोक्ताओं के घर पर दस्तक दिया, उनकी पीड़ा सुनी। पर, मनमाने बिजली बिली की शिकायतें भी राजधानी में कम नहीं हैं। पीड़ित उपभोक्ता गलत रीडिंग से बने बिल को लेकर दौड़ते रहते हैं, लेकिन बिजली अभियंता उनको टरकाते रहते हैं।

गलत बिलिंग की शिकायतें कोई नई नहीं हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा एवं यूपी पावर कॉर्पोरेशन ने कई बार निर्देश दिए फिर भी बिलिंग कंपनी की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है। मंत्री एवं प्रबंधन ने गलत रीडिंग से बने बिलों के मामलों में मीटर रीडरों पर एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए, पर बिजली अभियंता ऐसा नहीं करते। दरअसल, गलत बिलिंग और सुधारने के नाम पर उगाही, भ्रष्टाचारियों के लिए कमाई का एक अलग जरिया बन गई है।
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ऐसे सांठगांठ से चलता है खेल...

सूत्र बताते हैं कि इलाकाई एसडीओ, एक्सईएन, बिलिंग कंपनी के मीटर रीडरों की सांठगांठ से ही मनमाने बिल बनते हैं। मीटर रीडर शिकार की तलाश कर गलत रीडिंग फीड करता है। ज्यादा बिल आने पर उपभोक्ता कभी बाबू तो कभी एसडीओ के पास दौड़ता रहता है। जब बाबू एवं एसडीओ नहीं सुनते, तो वह खंडीय एक्सईएन को पीड़ा सुनाता है। वहां से भी समाधान नहीं मिलने पर वह दलाल के चंगुल में फंस जाता है। कुछ चढ़ावा चढ़ाते ही कुछ ही मिनटों में उसका बिल सुधर जाता है।



अगर अफसर सुनते-जांचते तो नहीं होती ये समस्या

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की टीम को मैदान में उतरना नहीं पड़ता अगर अफसर औचक निरीक्षण कर उपभोक्ता सेवाओं का जायजा लेते। पता करते कि किस कार्यालय में कितने गलत बिल को सही करने के आवेदन आए, कितने सुधारे गए, कैसे सुधारे गए, उपभोक्ता से फीडबैक लेते तो सारी हकीकत सामने आ जाती।



बस इन्हें एक कॉल कर लें अफसर...हकीकत पता चल जाएगी



मीटर में 599 यूनिट, बिल बना दिया 689 का, दो माह से काट रहे चक्कर

चिनहट के नंदपुर के रहने वाले अब्दुल्ला खान (9451062215) दो माह से गलत रीडिंग से बने बिल को संशोधित कराने के लिए एसडीओ के चक्कर काट रहे हैं। अब्दुल्ला का कहना है कि उनके मीटर में 599 यूनिट थी, लेकिन बिल 689 यूनिट का बना दिया गया। इससे उनका बिल 21,796 रुपये का बन गया। बिल सही नहीं होने के कारण वे जमा नहीं कर पा रहे हैं।





हर महीने 900 रुपये का बना रहे बिल



बीकेटी खंड के आईआईएम रोड स्थित सरहिया गांव निवासी नंदिनी (7355718418) का बिजली बिल हर महीने 900 रुपये का बन रहा है। नंदिनी बताती हैं कि उनका एक किलोवाट का कनेक्शन है। घर में एक पंखा है और दो सीएफएल बल्ब जलते हैं। उनका आरोप है कि उनके मीटर की रीडिंग 1200 यूनिट है, लेकिन बिल पर 1546 यूनिट चढ़ा दिया गया। यह भी आरोप है कि जब से उनके यहां कनेक्शन हुआ, एक बार भी मीटर रीडिंग लेने कोई नहीं आया।





गलत बिजली बिल को सही नहीं कर रहे बाबू-एसडीओ

पिंकसिटी कॉलोनी बुद्धेश्वर चौराहा निवासी सरिता त्रिपाठी (9305953718) का आरोप है कि उनका गलत बिल बाबू एवं एसडीओ सही नहीं कर रहे हैं। रीडर ने मीटर में दर्ज हुए 12096 की जगह पर 13293 यूनिट का बिल बना दिया। सरिता कहती हैं कि कार्यालयों के चक्कर लगा कर मैं थक गई हूं।



ये भी लगा रहे चक्कर...

- सुल्तानपुर के प्रतापपुर कमैचा की रहने वाली शोभा यादव (9984299997) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के दफ्तरों का कई महीने से चक्कर लगा रही हैं। वह बताती हैं, मेरे बिल में 11,509 रुपये मनमाने तरीके से जोड़ दिए गए। पर, एसडीओ लंभुआ बिल सही नहीं कर रहे। अब संशोधन के लिए राजधानी में भी कोई नहीं सुन रहा।



- चिनहट के रहने वाले विशंभर प्रसाद शुक्ला (8765741428) का आरोप है कि उनका मनमाने तरीके से 40 हजार का बिल बना दिया गया। बिल कैसे बना इसका न तो कोई सही जवाब दे रहा है और न ही दुरुस्त किया जा रहा है। वह अगस्त से कार्यालयों के दौड़ लगा रहे हैं।
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गलत रीडिंग से बने बिलों की रिपोर्ट तलब करेंगे

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी भवानी सिंह खंगारौत गलत रीडिंग से बिल बनाए जाने के मामलों पर कहते हैं, प्रत्येक खंड में कितने उपभोक्ताओं के बिल गलत रीडिंग से बनाए और संशोधित किए गए, इसकी रिपोर्ट तलब करेंगे। फर्जी रीडिंग से बिल बनाने की शिकायत मेरे पास आने पर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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