लखनऊ। ठाकुरगंज स्थित निजी केंद्र की रेडियोलॉजिस्ट ने अल्ट्रासाउंड जांच में बच्चे को स्वस्थ बताकर रिपोर्ट थमा दी। जबकि बच्चे के कई अंगों का विकास नहीं हुआ था। दिव्यांग बच्चा पैदा होने पर परिवारीजनाें ने डॉक्टर पर गलत जांच रिपोर्ट देने का आरोप लगाया। मामले की लिखित शिकायत सीएमओ ऑफिस में दर्ज कराई है। मामले की जांच शुरू हो गई है। डॉक्टर की लापरवाही उजागर होने पर प्रैक्टिस पर छह माह का प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की जा सकती है।
न्यू हैदरगंज कैंपवेल रोड सआदतगंज के रहने वाले राहुल मौर्या की गर्भवती पत्नी प्रज्ञा (24) का इलाज शिल्पी हॉस्पिटल में चल रहा था। बच्चे के शरीर के विकास का पता करने के लिए डॉक्टर शिल्पी ने प्रज्ञा को खन्ना डायग्नाेस्टिक सेंटर भेजा। जहां टारगेटेड इमेजिंग फॉर फीटल एनॉमिलीज यानी टिफा स्कैन व अल्ट्रासाउंड जांच हुई। पति राहुल का आरोप है कि निजी सेंटर पर टिफा की गलत जांच रिपोर्ट थमा दी गई। इसमें बच्चे के सभी अंग सामान्य दिखाए गए थे। 18 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर सुबह करीब 11 बजे डॉक्टर शिल्पी के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पहले डॉक्टर ने सामान्य प्रसव की बात कही। मगर बाद में ऑपरेशन कर बच्चे को निकाला गया तो वह मृत मिला। सीएमओ डॉ. मनोज ने बताया कि पति ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। जांच में दोनों डॉक्टरों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। जांच में कोताही मिलने पर केंद्र पर कार्रवाई की जाएगी।
बायां कान व एक पैरा छोटा था
पति ने बताया गर्भधारण के पांचवें माह में खन्ना डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच के दौरान बच्चे के सभी अंगों को सामान्य बताया गया। प्रसव बाद बच्चे का बांया कान व बच्चे का एक पैर छोटा व बड़ा था। अंडकोष भी गायब थे। पूरे शरीर पर कई जगह काले-काले धब्बे मिले थे। परिजनों ने निजी डायग्नोस्टिक पर गलत जांच रिपोर्ट दिए जाने का आरोप लगाया।
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टिफा जांच से 60 फीसदी तक ही पता चलता है, आरोप बेबुनियाद
निजी रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सिमरन का कहना है कि नौवें माह में बच्चे की डिलीवरी हुई थी। पांचवें माह में बच्चे की जांच मैंने की थी। टिफा जांच 60 फीसदी अंगों के बारे में बता सकती है। बच्चे की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत ब्रेन इंजरी से हुई है। पांचवें माह में टिफा के बाद कोई भी अल्ट्रासाउंड नहीं कराया गया। तीमारदार बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।