लखनऊ। लेसा की काहिली की कीमत सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी श्रवण राजपाल को हर महीने करीब 25 हजार रुपये चुकानी पड़ रही है। उद्यमी को स्वीकृत 160 किलोवाट के विद्युत लोड के हिसाब से साल भर पहले लाइन तैयार कर दी गई होती, ताे उन्हें यह जुर्माना नहीं झेलना पड़ता। जिला उद्योग बंधु की बैठकों में भी उद्यमी ने दो बार मुद्दा उठाया, पर समाधान नहीं हुआ। मामले ने तूल पकड़ा तो लेसा जागा और 24 घंटे के अंदर स्वीकृत लोड के मुताबिक ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली चालू कर दी।
उद्यमी ने अपनी इकाई कृष्णा पेट्रोकैम का विद्युत लोड 40 किलोवाट से बढ़ाकर 160 किलोवाट किए जाने के लिए वर्ष 2019 में आवेदन किया था। तत्कालीन अधिशासी अभियंता संदीप तिवारी ने विद्युत लोड बढ़ा दिया था। कोरोना काल में उद्योगों की हालत पतली हुई तो उद्यमी ने हालात सुधरने पर विद्युत लोड बढ़ाने का आग्रह किया। उद्योगों की हालत सुधरने पर उद्यमी ने दोबारा विद्युत लोड को बढ़ाने का मामला उठाया। पर, एक साल से लेसा के कर्मचारी टालमटोल करते रहे। इसकी वजह से उन्हें 100 किलोवाट से अधिक का बिजली इस्तेमाल करने पर जुर्माना देना पड़ रहा था। इसमें मौजूदा एसडीओ (उपखंड अधिकारी) परविंदर यादव एवं जेई (अवर अभियंता) नितिन चौधरी के साथ ही पूर्व में तैनात रहे एसडीओ व जेई ने लापरवाही रही।
एस्टीमेट दिया तो बताया ही नहीं कि ट्रांसफार्मर उद्यमी को ही लगाना है
सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्र के एसडीओ एवं जेई ने लाइन के एस्टीमेट के करीब छह लाख रुपये तो जमा करा लिए, मगर श्रवण राजपाल को यह नहीं बताया कि 250 केवीए का ट्रांसफार्मर उन्हें ही खरीद करके लगाना है। उद्यमी यह समझते रहे कि छह लाख रुपये में ट्रांसफार्मर की लागत भी शामिल है। डीएम सूर्यपाल गंगवार के पास मामला पहुंचा तब लापरवाही की परतें उधड़ने लगीं।
लाइन बनाने का ब्योरा आने के बाद भी करते रहे अनदेखी
उद्यमी श्रवण राजपाल ने कोरोना काल के बाद 2022 में जब दोबारा अधिशासी अभियंता से मुलाकात करके विद्युत लोड बढ़ाने का अनुरोध किया तभी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। अधिशासी अभियंता ने बढ़े हुए विद्युत लोड के मुताबिक उसी साल जुलाई में इसके लिए मैटेरियल का ब्योरा परविंदर यादव एवं जेई नितिन चौधरी को भेज दिया था। इन दोनों ने इसके बाद भी कुछ नहीं किया।
कहीं ये वजह तो नहीं : उद्यमी ने नहीं दिया सुविधा शुल्क
लेसा में नए कनेक्शन का विद्युत लोड स्वीकृत करने एवं विद्युत लोड बढ़ाने का सुविधा शुल्क तय है। सूत्रों के मुताबिक अभी 1500 रुपये प्रति किलोवाट इसकी वसूली होती है। इसके बिना काम आगे नहीं बढ़ता। आदेश के बावजूद लाइन तैयार करने का काम नहीं शुरू करने के पीछे की वजह कहीं उद्यमी का सुविधा शुल्क नहीं देना ही तो नहीं है।
पहले उद्यमी ने कहा था विद्युत लोड नहीं बढ़ाना
अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंंड सेस प्रथम लेसा सिस गोमती डीके यादव कहते हैं उद्यमी श्रवण राजपाल ने विद्युत लोड बढ़ाने का शुल्क जमा करने के बाद खुद ही उसकी प्रक्रिया को रोकने के लिए कहा था। उद्यमी ने कोरोना काल में उद्योग की हालत खराब होने के कारण विद्युत लाेड को न बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके कारण ही विद्युत लोड नहीं बढ़ सका।