शहर के बिजनौर थाने का भवन बीच सड़क पर बनाने के मामले में बुधवार को लखनऊ के पुलिस कमिश्नर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बिजनौर थाने को एक वर्ष के भीतर कहीं और शिफ्ट कर दिया जाएगा। उनके इस आश्वासन के बाद कोर्ट ने मामले में दाखिल जनहित याचिका निस्तारित कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने त्रिलोचन सिंह व अन्य की याचिका पर दिया।
जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया था कि बिजनौर थाने का भवन, सड़क पर अतिक्रमण करके बनाया गया है। याची का कहना था कि ठीक चौराहे पर थाना बनाए जाने से यहां भीषण जाम की समस्या हमेशा रहती है। यही नहीं पुलिस द्वारा सीज की गई गाड़ियां तथा पुलिसकर्मियों की गाड़ियां भी थाने के बाहर खड़ी होती हैं, जिसकी वजह से आने जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। याचिका पर मई 2022 में ही कोर्ट ने जवाब मांगा था। आदेश के बावजूद कोई जवाब न आने पर कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को तलब किया था। उधर, राज्य सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता आनंद कुमार सिंह पेश हुए। पुलिस कमिश्नर ने पेश होकर कोर्ट को बताया कि बिजनौर थाने के लिए जो जगह प्रस्तावित है, उसके ऊपर से बिजली की हाईटेंशन लाइन गुजरती है। फिर भी उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सालभर में थाने को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाएगा।