हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का फ्रांस से आयात एयरक्राफ्ट का एक कन्साइनमेंट गायब हो गया। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कन्साइनमेंट न मिलने के बाद तलाश की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके एवज में एचएएल ने बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस से क्लेम मांगा। कंपनी ने क्लेम में कटौती कर दी। मामला राज्य उपभोक्ता आयोग पहुंचा। वहां आयोग के सदस्य राजेन्द्र सिंह और विकास सक्सेना ने इसे देश की सुरक्षा का मुद्दा बताया और कंपनी पर क्लेम में की गई कटौती का लगभग चार गुना जुर्माना लगाया।
एचएएल विभिन्न तरह के कलपुर्जों का आयात विदेशों से करता है। उसने एयरक्राफ्ट के कुछ कलपुर्जों और अलग-अलग हिस्सों को मंगवाने के लिए फ्रांस की एक कम्पनी को आर्डर दिया। इस सम्बन्ध में यूनाइटेड इंडिया से मरीन कार्गो ओपन पालिसी ली और करोड़ों रुपये का प्रीमियम दिया।
एयरक्राफ्ट से सम्बन्धित कलपुर्जों और हिस्सों को दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारना था। फिर लखनऊ तक एचएएल के वर्कशॉप तक पहुँचाना था। जब ये कन्साइनमेंट नई दिल्ली के इन्दिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पहुँचा तब पाया गया कि एक कन्साइनमेंट कम है। उसमें विभिन्न कलपुर्जे थे।
एचएएल को उस कन्साइनमेंट का कोई पता नहीं चला। इस पर 68 लाख रुपये का क्लेम किया। बीमा कम्पनी ने 10 प्रतिशत व 25 प्रतिशत कटौती करते हुए 49 लाख दिए। एचएएल ने 19 लाख कम देने पर आपत्ति की लेकिन उस पर कार्यवाही नहीं हुई। तब एचएएल ने विपक्षी कम्पनी के राज्य उपभोक्ता आयोग की शरण ली। प्रिसाइडिंग जज राजेन्द्र सिंह ने साक्ष्यों को देखते पाया कि मामला देश की सुरक्षा से सम्बन्धित था और इसमें एक कन्साइनमेंट का न पहुँचना अत्यन्त आपत्तिजनक है। बीमा कम्पनी ने भी अनावश्यक रूप से बीमा राशि में कटौती की है।
आयोग ने बीमा कम्पनी को आदेश दिया कि वह शेष बकाया राशि,समय से दावे का निस्तारण न करने,देश की सुरक्षा को खतरा पहुँचाने और वाद व्यय के मद में कुल 33,50,000 रुपये दे। इस पर 26 नवंबर 2011 से 12 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा। ब्याज की ये रकम लगभग 48 लाख रुपये होती है। यानी बीमा कंपनी को करीब 81.50 लाख रुपये एक महीने के अंदर देना होंगे।