इस टीम में पुलिस अधिकारियों के अतिरिक्त जीएसटी के जांच अधिकारी, टैक्स विशेषज्ञ, आडिट एक्सपर्ट और साइबर एक्सपर्ट भी रहेंगे। राज्य कर आयुक्त मिनिस्ती एस ने मानीटरिंग के लिए संयुक्त आयुक्त राज्य कर मुख्यालय हरिलाल प्रजापति को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
देशभर की 455 फर्मों द्वारा 601 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी मामले की जांच के लिए राज्य कर आयुक्त ने एसआईटी गठित करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक मई को आदेश दिए थे। इस टीम में पुलिस अधिकारियों के अतिरिक्त जीएसटी के जांच अधिकारी, टैक्स विशेषज्ञ, आडिट एक्सपर्ट और साइबर एक्सपर्ट भी रहेंगे। राज्य कर आयुक्त मिनिस्ती एस ने मानीटरिंग के लिए संयुक्त आयुक्त राज्य कर मुख्यालय हरिलाल प्रजापति को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
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देशभर की 455 फर्मों और कंपनियों ने 601 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया था। ये जालसाजी गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेकर की गई। जांच में पाया गया कि इनमें से 49 फर्में उत्तर प्रदेश में पंजीकृत हैं। जिन्होंने 182 करोड़ रुपये का गोलमाल किया लेकिन जीएसटी अधिकारी केवल 66 लाख रुपये ही वसूल सके। इस मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के आदेश दिए थे।
एसआईटी में राज्य कर विभाग और पुलिस के अधिकारी संयुक्त रूप से काम करेंगे। सहयोग और निगरानी की जिम्मेदारी हरिलाल प्रजापति को दी गई है। सूत्रों के मुताबिक अरबों के इस खेल में विभाग के कई वरिष्ठ अफसरों की भी मिलीभगत है। यही वजह है कि महज 66 लाख रुपये जमाकर पूरे प्रकरण की फाइल बंद करने की साजिश रची गई थी।