आगरा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एमबीबीएस और बीएएमएस की परीक्षा की कॉपियां बदलने का मामला सामने आने के बाद करीब 5000 छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया था। इस प्रकरण की जांच बीते दिनों एसटीएफ ने भी शुरू की थी, हालांकि यह परवान नहीं चढ़ सकी। वहीं, आगरा पुलिस की शुरुआती जांच में परीक्षा कराने वाली कार्यदायी संस्था के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिला था।
आगरा पुलिस ने अदालत में दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में डेविड मारिया और उनकी कंपनी डिजिटेक्स टेक्नोलॉजी को आरोपी नहीं बनाया था। वहीं दूसरी ओर बीते तीन महीने से इस मामले की गोपनीय तरीके से पड़ताल कर रही ईडी लगातार मारियो के खिलाफ सुबूत जुटा रही थी। ईडी ने उसे बीते दो माह के दौरान आधा दर्जन से अधिक बार पूछताछ के लिए बुलाया था। बृहस्पतिवार को तलब किए गए मारियो को 24 घंटे तक लगातार पूछताछ के बाद गिरफ्तार करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा छात्रनेता राहुल पाराशर और टेंपो चालक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को आगरा पुलिस ने भी गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उनको जमानत मिल गई थी।
शिकायत पर वीसी ने कराया था चेक
दरअसल, कॉपियां बदलने की शिकायत एक छात्रनेता ने तत्कालीन वीसी विनय पाठक से की थी। उन्होंने अपने प्रति-कुलपति को जांच करने भेजा, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। फिर वीसी ने गणित विभाग के अध्यक्ष को प्राइवेट गाड़ी से टेंपो का पीछा करने को कहा। टेंपो छलेसर स्थित कार्यदायी संस्था के कार्यालय पर जाने के बजाय एक गली में मुड़ गया, जहां पर कॉपियां बदलने के लिए उतारी जाने लगी। इसका खुलासा होने पर वीसी ने तत्काल मुकदमा दर्ज करने को कहा। इस प्रकरण में एसआईटी का भी गठन हुआ था, जिसने जांच में पाया था कि डिजिटेक्स टेक्लोनॉजीस को बीते कई सालों से परीक्षा कराने का काम दिया जा रहा था।
कोड भी बदल देते थे
जांच में सामने आया कि डिजिटेक्स टेक्नोलॉजीस के संचालक और कर्मचारी छात्रनेता राहुल पाराशर के घर पर आने वाली कॉपियों को बदल देते थे। इनके स्थान पर नई कॉपियां लिखी जाती थी, जिसमें नया बार कोड भी डाला जाता था। वहीं, कार्यदायी संस्था परीक्षा केंद्रों से कॉपियां मिलने के समय में भी हेराफेरी करती थी। वह परीक्षा के दिन कॉपियां मिलना दर्शाती थी, जबकि ये कॉपियां कई दिन बाद उसके पास पहुंचती थी। इसी दौरान सारा खेल होता था।