निकाय चुनाव में पिछड़े वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा 30 से 35 फीसदी तक टिकट ओबीसी वर्ग के प्रत्याशियों को देगी। वहीं निकाय चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक आधी आबादी के पूरे वोट पर कब्जा जमाने के लिए महिलाओं का टिकट भी बढ़ाया जाएगा। निकाय चुनाव में दोनों वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने लोकसभा चुनाव में भी इसका लाभ उठाने की रणनीति बनाई है।
निकाय चुनाव में यूं तो ओबीसी वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण निर्धारित है। लेकिन निकाय चुनाव से पहले आरक्षण को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद भाजपा ने ओबीसी वर्ग में माहौल सुधारने की कोशिश की है। पिछड़े वोट बैंक को साधने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने निकाय चुनाव में पिछड़े वर्ग को 27 फीसदी से बढ़ाकर 30 से 35 प्रतिशत तक टिकट देने का विचार किया है। खासतौर पर नगर पंचायत और नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष एवं सभासद के पदों पर पिछड़े वर्ग की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। सामान्य वर्ग की सीटों पर भी पिछड़े वर्ग के लोगों को प्रत्याशी बनाया जाएगा।
लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 तथा विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 में भाजपा को मिली जीत में आधी आबादी का बड़ा योगदान माना जाता है। पार्टी लगातार किसी न किसी कार्यक्रम के जरिये महिलाओं के बीच कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्हें पार्टी से जोड़ने और उनके बीच सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने का भी प्रयास करती है।
निकाय चुनाव में महिला वोट बैंक पर कब्जा बरकरार रखने के लिए उन्हें पहले से ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की रणनीति है। महिलाओं को 15 से 25 फीसदी तक टिकट दिए जाने की योजना है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष गीता शाक्य ने कहा कि निकाय चुनाव में महिलाओं को ज्यादा टिकट दिए जाएंगे।