प्रदेश के आयुष कॉलेजों में हुए दाखिलों में हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सरकार ने जांच बैठा दी है। काउंसिलिंग संबंधी दस्तावेज सील कर दिए गए हैं। साथ ही काउंसिलिंग कराने वाली एजेंसी के खिलाफ तहरीर दी गई है। आरोप है कि काउंसिलिंग के दौरान कई ऐसे छात्रों को दाखिला दे दिया गया जो नीट-2021 में शामिल ही नहीं हुए थे। कुछ ऐसे अभ्यर्थियों को भी दाखिला हुआ जिनकी मेरिट कम थी।
मामला खुलने के बाद प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों की पत्रावलियां जांची जा रही हैं। नीट 2021 के बाद प्रदेश के राजकीय एवं निजी आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक एवं यूनानी कॉलेजों को छात्रों को दाखिला दिया गया। इस बीच एक छात्रा ने राष्ट्रपति से शिकायत की कि उससे कम मेरिट वाले छात्र को दाखिला दे दिया गया। शिकायती पत्र राष्ट्रपति कार्यालय से राज्यपाल के जरिए आयुर्वेद निदेशालय पहुंचा।
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इस आधार पर राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, लखनऊ के छात्रों की जांच की गई तो छह का दाखिला संदिग्ध मिला। इन सभी को निलंबित कर दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। शुरुआती जांच में करीब 15 ऐसे छात्रों के नाम सामने आए हैं जो नीट में शामिल नहीं हुए थे। सूत्रों का कहना है कि अब तक प्रदेश के कुल सरकारी कॉलेजों में दाखिला लेने वाले करीब 50 और निजी क्षेत्र के करीब एक हजार छात्रों के दाखिले संदिग्ध माने जा रहे हैं। आयुर्वेद निदेशालय के निर्देश पर वाराणसी, बांदा, पीलीभीत, बरेली, प्रयागराज, झांसी सहित अन्य जिलों के कॉलेजों में भी नए सिरे से छात्रों की कुंडली कंगाली जा रही है। सभी प्रधानाचार्यों को 2021 में दाखिला लेने वालों के डॉक्यूमेंट सील करने के आदेश दिए गए हैं।
एजेंसी संचालक फरार
दस्तावेजों में हेराफेरी के मामले में प्रथमदृष्टया काउंसिलिंग कराने वाली एजेंसी को दोषी माना जा रहा है। एजेंसी संचालक फरार है। एजेंसी से जुड़े किसी भी कर्मचारी का फोन नहीं मिल रहा है। आयुर्वेद निदेशालय ने एजेंसी के खिलाफ हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि काउंसिलिंग के लिए अपट्रान के जरिए लखनऊ के वेंडर वी3 सॉल्यूशन को काम सौंपा गया था।
निदेशक आयुर्वेद सेवाएं प्रो. एसएन सिंह का कहना है कि पूरे मामले की पड़ताल चल रही है। काउंसिलिंग एजेंसी के खिलाफ तहरीर दी गई है। सभी प्रधानाचार्यों को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं। पूरे मामले में डाटा के हेरफेर की बात सामने आई है।
उच्च एजेंसी से होगी जांच
राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार आयुष एवं एफएसडीए डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु का कहना है कि अभी विभाग के विशेष सचिव की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय जिम्मेदारी तय की जा रही है। उच्च स्तरीय एजेंसी से भी मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अभी इस बात की पड़ताल की जा रही है कि आखिर इतना बड़ा खेल हुआ कैसे? क्योंकि काउंसिलिंग के बाद ही कॉलेजों को छात्रों की सूची भेजी गई थी। इसके बाद दाखिले हुए।