महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट पीपीपी मॉडल पर लगाया जाएगा। नगर निगम इस पर एक भी पैसा नहीं खर्च करेगा। प्लांट लगाने वाली कंपनी के लिए क्या नियम शर्तें होंगी और कितनी जमीन कंपनी को दी जाएगी, इसकी कार्ययोजना बनाई जा रही है। इस पर सभी पार्षदों की सहमति ली जाएगी। इसमें पार्षदों के जो सुझाव और आपत्तियां होंगी, उन्हें शामिल किया जाएगा। हैदराबाद सहित कई शहरों में ऐसे प्लांट लगे हैं जो सफल हैं। उसी तरह यहां भी प्लांट लगाया जाएगा। नगर निगम पर किसी तरह की कोई जिम्मेदारी लापरवाही करने वाली कंपनी न डाल सके, इसके लिए भी टेंडर में शर्तें रखी जाएंगी।
प्लांट चला नहीं और जमीन भी फंस गई
करीब दो दशक पहले भी हरदोई रोड पर बरावन खुर्द गांव में करीब 80 करोड़ रुपये से बिजली उत्पादन का प्लांट लगाया गया था, मगर एक भी दिन बिजली पैदा नहीं हुई। जिस निजी कंपनी एशिया बायो एनर्जी ने सरकारी अनुदान से प्लांट का निर्माण किया था, वह भी अपनी कमाई कर भाग गई और बैंक से कर्ज का विवाद छोड़ गई। इसके कारण करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। तब से प्लांट बंद पड़ा है, जमीन भी फंस गई है। उसका किसी और काम में उपयोग भी नहीं हो पा रहा है।