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Lucknow: नगर निगम फिर से लगाएगा कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट, एक बार फेल हो चुका है प्लांट

Thu, 19 Feb 2026 02:21 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि प्लांट लगाने वाली कंपनी के लिए क्या नियम शर्तें होंगी और कितनी जमीन कंपनी को दी जाएगी, इसकी कार्ययोजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्लांट पीपीपी मॉडल पर लगाया जाएगा।
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लखनऊ नगर निगम। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बेहतर कचरा प्रबंधन और शहर को स्वच्छता में नंबर वन बनाने के लिए नगर निगम कूड़े से बिजली उत्पादन का प्लांट लगाएगा। इसके लिए 21 फरवरी को सदन की विशेष बैठक बुलाई गई है, जिसमें पीपीपी मॉडल पर प्लांट लगाने वाली कंपनी को मुफ्त में जमीन देने और कंपनी चयन के लिए नियम शर्तें तय करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। नगर निगम ने करीब दो दशक पहले भी इस तरह का प्लांट लगाया था जो फेल हो गया था।

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स्वच्छ सर्वेक्षण प्रतियोगिता में शहर को 44वें पायदान से तीसरे पर लाने वाले पूर्व नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह का मानना है कि अगर हमें स्वच्छता में बेहतर बनना है और कचरे का बेहतर प्रबंधन करना है तो कूड़े से बिजली उत्पादन का प्लांट लगाना होगा।

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अब कचरे का स्वरुप भी बदला है, जिसमें प्लास्टिक ज्यादा आ रही है। इसका निस्तारण कठिन होता है। अभी प्लास्टिक के साथ जो न सड़ने वाला कचरा, लकड़ी, कपड़ा आदि आता है, उससे आरडीएफ (जलने वाले ब्लॉक) बनाए जाते हैं जो सीमेंट फैक्ट्रियों में काम आते हैं। अपने प्रदेश में सीमेंट फैक्ट्रियां नहीं हैं। ऐसे में इसे दूसरे प्रदेशों में भेजना पड़ता है।

इस पर खर्च अधिक आता है। इसे देखते हुए कूड़े से बिजली का प्लांट लगाना फायदेमंद है। वहीं, अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद राव का कहना है कि बिजली प्लांट लगने पर कई फायदे होंगे। शहर से जितना कूड़ा निकलेगा, उसका निस्तारण आसानी से हो जाएगा। आरडीएफ को बाहर भेजने के जरूरत भी नहीं रहेगी। प्लांट में बनने वाली बिजली बेचने पर आमदनी भी होगी।

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एक पैसा भी नहीं खर्च करेगा नगर निगम

महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट पीपीपी मॉडल पर लगाया जाएगा। नगर निगम इस पर एक भी पैसा नहीं खर्च करेगा। प्लांट लगाने वाली कंपनी के लिए क्या नियम शर्तें होंगी और कितनी जमीन कंपनी को दी जाएगी, इसकी कार्ययोजना बनाई जा रही है। इस पर सभी पार्षदों की सहमति ली जाएगी। इसमें पार्षदों के जो सुझाव और आपत्तियां होंगी, उन्हें शामिल किया जाएगा। हैदराबाद सहित कई शहरों में ऐसे प्लांट लगे हैं जो सफल हैं। उसी तरह यहां भी प्लांट लगाया जाएगा। नगर निगम पर किसी तरह की कोई जिम्मेदारी लापरवाही करने वाली कंपनी न डाल सके, इसके लिए भी टेंडर में शर्तें रखी जाएंगी।

प्लांट चला नहीं और जमीन भी फंस गई
करीब दो दशक पहले भी हरदोई रोड पर बरावन खुर्द गांव में करीब 80 करोड़ रुपये से बिजली उत्पादन का प्लांट लगाया गया था, मगर एक भी दिन बिजली पैदा नहीं हुई। जिस निजी कंपनी एशिया बायो एनर्जी ने सरकारी अनुदान से प्लांट का निर्माण किया था, वह भी अपनी कमाई कर भाग गई और बैंक से कर्ज का विवाद छोड़ गई। इसके कारण करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। तब से प्लांट बंद पड़ा है, जमीन भी फंस गई है। उसका किसी और काम में उपयोग भी नहीं हो पा रहा है।
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