मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कानपुर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया की अनियमितताओं पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद वहां सख्ती हुई, लेकिन राजधानी लखनऊ में नगर निगम में मनमानी जारी है। यहां हर साल करीब 500 करोड़ रुपये के काम बिना ई टेंडर के कराए जा रहे हैं। इससे टेंडर पूलिंग को बढ़ावा मिल रहा है। प्रतिस्पर्धा न होने से नगर निगम को नुकसान हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार मैनुअल टेंडर से पूलिंग आसान हो जाती है। हर वार्ड का एक निश्चित ठेकेदार है जिसे लंबे समय से काम मिल रहा है। ये ठेकेदार जनसेवकों के खास होते हैं। यदि कोई अन्य ठेकेदार टेंडर डालता है तो उसे किसी न किसी वजह से निरस्त कर दिया जाता है। इससे प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है और मनमानी बढ़ती है।
नगर निगम के 50 से अधिक वार्डों में सफाई का काम कार्यदायी संस्थाओं के जरिये हो रहा है। इन कार्यों के लिए भी ई टेंडर नहीं कराए जा रहे हैं। ये कार्यदायी संस्थाएं केवल प्रस्ताव पर ही काम कर रही हैं। ऐसे में सालाना करीब 200 करोड़ रुपये का सफाई कार्य बिना टेंडर के ही कराया जा रहा है।
महापौर सुषमा खर्कवाल से जब पूछा गया कि ई टेंडर पूरी तरह से क्यों लागू नहीं है और क्या आगे इसे लागू करेंगी तो उन्होंने कहा कि इस बारे में नगर आयुक्त से बात करें, वही बताएंगे। हालांकि नगर आयुक्त से बात नहीं हो सकी।