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मेट्रो पर चुनावी सियासत के काले बादल

Thu, 01 Aug 2013 11:17 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच चुनावी माहौल में बढ़ती तल्खी लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना पर भारी पड़ सकती है।
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केंद्र सरकार के नगर विकास मंत्रालय से मेट्रो परियोजना के अनुमोदन के लिए आधिकारिक स्तर पर कोशिशों के साथ ही राजनैतिक मदद की भी आवश्यकता होगी।

जयपुर मेट्रो रेल परियोजना को केंद्र से जिस तेजी से स्वीकृति मिली, उसके पीछे राजस्थान में कांग्रेस की सरकार होना एक बड़ा कारण रहा।

मगर प्रदेश में इसकी उलट स्थिति को देखते हुए इस मामले में रोड़े आने की आशंका है।

फिलहाल मेट्रो सेल के अधिकारियों को मंत्रालय में परेशानियों का सामना अभी से ही करना पड़ रहा है। जो कि भविष्य में और बढ़ेगा, इसकी आशंका है।

मेट्रो रेल परियोजना के लिए अगला पड़ाव केंद्र से इसका अनुमोदन होगा।

केंद्र के नगर विकास मंत्रालय में लखनऊ मेट्रो की परियोजना, स्पेशल पर्पजइ व्हीकल और एक्ट को पास कराना होगा।

मंत्रालय में यह प्रस्ताव रखे जाने के बाद वहां से विभिन्न विभागों की इस पर राय मांगी जाएगी।

नागरिक उड्डयन, न्याय, रेलवे, पर्यावरण एवं वन, भूगर्भ जल विभाग, ऐसे ही कई अन्य विभाग इस परियोजना पर अपनी टिप्पणी देंगे।

इसी आधार पर शहरी विकास मंत्रालय इस पर अपनी राय देगा। जिसके बाद में परियोजना का अनुमोदन होगा।

मगर यह प्रक्रिया वर्तमान में केंद्र और राज्य के बीच संबंधों पर भी निर्भर कर रही है।

जयपुर में जब मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का केंद्र सरकार से अनुमोदन लिया जाना था, तब बहुत तेजी से काम हुआ था।

राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने केंद्र में अपने अच्छे रिश्तों का फायदा उठाया। वहां चुनावी माहौल के चलते फटाफट काम हुआ और परियोजना पास हो गई।

अब राजस्थान में परियोजना के निर्माण का काम तेजी से जारी है। मगर उत्तर प्रदेश का माहौल ठीक उल्टा है।

प्रदेश सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी और केंद्र की कांग्रेस के रिश्ते लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही कुछ खास अच्छे नहीं रह गए हैं।

ऐसे में लखनऊ मेट्रो से मिलने वाला राजनैतिक लाभ आसानी से सपा को मिल पाएगा, इसमें शक है।
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