दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को राजधानी के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का कंसल्टेंट बने एक माह बीत चुका है। मेट्रो सेल का ऑफिस तैयार है और डीएमआरसी के अधिकारियों के इंतजार में तीन केबिन खाली हैं।
मगर दिल्ली से न तो कोई प्रतिनिधि आया न ही कोई संदेश। ऐसे में कंसल्टेंट के जिम्मे के 14 काम कैसे पूरे होंगे, इसका जवाब अधिकारियों के पास नहीं है।
मेट्रो सेल के अधिकारी लगातार दावा कर रहे हैं कि नवंबर-दिसंबर तक मेट्रो संबंधी निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
मगर डीएमआरसी के पास बतौर कंसलटेंट जो काम हैं, उनकी प्रगति क्या है, इस विषय में जानकारी नहीं दी जा रही है।
10 सितंबर को कैबिनेट ने कंसल्टेंट चयन पर अपनी मुहर लगा दी थी। इस बारे में पूछने पर जवाब मिलता है कि डीएमआरसी अपना काम दिल्ली में कर रहा है।
कहीं भारी न पड़ जाए सुस्ती
विशेषज्ञों का कहना है कि आचार संहिता के तौर पर भी मेट्रो निर्माण कार्यों पर एक खतरा मंडरा रहा है। इस संबंध में एक से दो महीने की देरी हुई तो संहिता लागू हो जाएगी।
उसके बाद लगभग छह महीने तक दोबारा मेट्रो संबंधी कोई भी टेंडर किया जाना लगभग असंभव हो जाएगा। ऐसे में परियोजना अपने आप ही छह महीने के विलंब में चली जाएगी। ऐसे में अधिकारियों की निश्चिंतता परियोजना पर भारी पड़ने की आशंका बढ़ती जा रही है।