मेट्रो रेल परियोजना को अब और रफ्तार मिलेगी। यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) ने इस प्रोजेक्ट को ऋण देने के लिए हामी भर दी है। बैंक ने इसकी पुष्टि एलएमआरसी से कर दी है। बहुत जल्द ही इस संबंध में केंद्र सरकार के साथ बैंक का अनुबंध होगा।
वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए बैंक एलएमआरसी को 23 मिलियन यूरो यानी करीब 170 करोड़ 52 लाख रुपये देगा। एलएमआरसी को यह कर्ज मार्च से पहले मिल जाएगा। इसके साथ ही बिजली से जुड़े तमाम कामों का 363 करोड़ रुपये का टेंडर एलएंडटी लिमिटेड को दे दिया गया है।
वहीं चारबाग से केडी सिंह बाबू स्टेडियम तक भूमिगत सेक्शन के लिए 1300 करोड़ रुपये का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार कर अनुमोदन के लिए ईआईबी को भेजा गया है। टेली कम्यूनिकेशन के करीब 135 करोड़ रुपये के टेंडर का भी अनुमोदन बैंक ने कर दिया है।
एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने बुधवार को मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि पीआईबी की स्वीकृति के बाद ईआईबी ने एलएमआरसी को ऋण देने की बात पहले ही कह दिया था। अब इसकी औपचारिक पुष्टि हो गई है। अनुबंध केंद्र सरकार और बैंक के बीच होगा। इसमें करीब 4000 करोड़ रुपये का ऋण ईआईबी देगा, जो करीब एक प्रतिशत सालाना की ब्याज दर पर एलएमआरसी को मिलेगा।
अब नहीं होगा धन का संकट
कुमार केशव ने बताया कि हमको इस वित्तीय वर्ष में जो 23 मिलियन यूरो मिलने है, वह मार्च से पहले ही मिल जाएंगे। इससे परियोजना की प्रगति और तेज होगी। जबकि, अगले वित्तीय वर्षों में जब बहुत अधिक धन की आवश्यकता होगी तब किस्तें और बड़ी होती जाएंगी। इस तरह से एलएमआरसी के लिए अब भविष्य में कोई भी आर्थिक संकट नहीं रहेगा।
एलएमआरसी के बिजली से संबंधित काम अब तेजी पकड़ेंगे। 363 करोड़ रुपये का ट्रैक्शन का टेंडर एलएंडटी लिमिटेड को दे दिया गया है। इसमें ट्रांसपोर्ट नगर से मुंशीपुलिया के बीच 22 किलोमीटर तक ओएचई वायर के अलावा एक सब स्टेशन और स्टेशनों पर भी विद्युतीकरण का काम कंपनी करेगी।
ईआईबी ने भी इस टेंडर को हरी झंडी दे दी है। इसको एलएमआरसी ने बोर्ड मीटिंग में अनुमोदित भी कर दिया है। पहले आठ किलोमीटर के सेक्शन के लिए इस काम को जुलाई-2016 तक खत्म करने का लक्ष्य एलएंडटी लिमिटेड को दिया गया है।
अंडरग्राउंड सेक्शन के लिए 1300 करोड़ का टेंडर
चारबाग से केडी सिंह बाबू स्टेडियम तक करीब चार किलोमीटर के भूमिगत सेक्शन के सिविल वर्क लिए 1300 करोड़ रुपये का टेंडर होगा। भूमिगत सेक्शन का ये टेंडर ड्रॉफ्ट ईआईबी को भेज दिया गया है। ड्राफ्ट करीब एक सप्ताह में अनुमोदित कर एलएमआरसी को भेज देगा। इसके बाद में टेंडर जारी कर के कंपनी चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। ये चयन तीन महीने में पूरा होगा। फिर कंपनी चुन कर मार्च से पहले निर्माण किया जाएगा।
ईआईबी जो अगले 31 मार्च तक 23 मिलियन यूरो की पहली किस्त एलएमआरसी को देगा, उसमें कई बड़े अंतर परियोजना पर पड़ेंगे। इसके तहत सिविल निर्माण का बकाया भुगतान एलएमआरसी कर सकेगा। जबकि, ट्रैक्शन, रोलिंग स्टॉक, बोगी, टेली कम्यूनिकेशन, भूमि अर्जन सहित मेट्रो के प्रोजेक्ट के लिए जरूरी काम भी एलएमआरसी कर सकेगा। हर टेंडर के लिए कुल रकम में से 10 फीसदी का भुगतान एलएमआरसी को शुरुआत में ही करना पड़ेगा। ऐसे में लगभग 150 करोड़ रुपये का इस्तेमाल हो सकेगा।
परियोजना को आवास विकास परिषद ने अपने हिस्से के 40 करोड़ रुपये दे दिए हैं। जबकि, एलडीए की ओर से भी 10 करोड़ रुपये एलएमआरसी को दिए गए हैं। जबकि, इससे पहले 200 करोड़ रुपये राज्य सरकार के हिस्से के तौर पर एलएमआरसी को मिल चुका है। ऐसे में वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक एलएमआरसी को कोई भी वित्तीय संकट अब नहीं होगा।