लखनऊ में पिछले 20 दिनों से महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच अधिकारों को लेकर चल रहा टकराव दूर हो गया और बृहस्पतिवार को कार्यकारिणी बैठक शांतिर्पूवक संपन्न हुई। उसमें में शहर के विकास कार्याें को लेकर बात हुई।
नगर निगम में करीब 100 कम्प्यूटर आपरेटर कार्यदायी संस्थाओं के जरिए अलग-अलग विभागों में तैनात हैं। इनमें किसी को आठ हजार तो किसी को 15 हजार और किसी का 12 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। इसको लेकर कई बार विवाद हो चुका है। जिसके बाद नगर निगम कार्यकारिणी में इसका प्रस्ताव लाया गया।
जिसमें यह तय किया गया कि शासन के अन्य विभागों में लागू नियमों के तहत अब नगर निगम में भी सभी कम्प्यूटर आपरेटारों को एक समान 19800 रुपये महीना मानदेय दिया जाएगा। जो कम्प्यूटर आपरेटर लापरवाह या अयोग्य होंगे उनको हटाया भी जाएगा। जानकारेां का कहना है बहुत से आपरेटर सिफारिश हैं। निगम कर्मियों के ही करीबी और परिवार के हैं, जिनको काम सही तरह से नहीं आता है मगर सिफारिश पर लगे हुए हैं।
महापौर ने बताया कि जो भवनस्वामी सोलर लगाएंगे उनको गृहकर में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसको लेकर नियमावली तैयार की जाएगी। उसके बाद इसे नए वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा। वहीं मामले के जानकार अफसरों ने कार्यकारिणी में यह मामला भी उठाया कि इस तरह से छूट देने से नगर निगम की गृहकर आय पर असर पड़ेगा साथ ही उन लोगों की आपत्तियां भी आएंगी जो गृहकर जमा कर चुके हैं।
पार्षद अनुराग मिश्रा अन्नू ने कहा कि सोलर में छूट देने से पहले नगर निगम छूट का वह समय बहाल करे जो उसने घटा दिया है। पहले अप्रैल से जुलाई तक 10 प्रतिशत और अगस्त से दिसंबर तक पांच प्रतिशत की छूट सभी भवन स्वामियों को नगर निगम देता था मगर अब यह अप्रैल से जून तक ही दी जाती है। ऐसे में पहले नौ महीने छूट मिलती थी जो अब तीन महीने ही मिल रही है। पार्षद ने कहा कि वह इस मामले को सदन में उठाएंगे।
महापौर नगर आयुक्त के बीच जिस तरह अधिकारों को लेकर टकराव बुधवार तक चल रहा था वह अचानक बृहस्पतिवार को कैसे दूर हो गया, इसको लेकर सब हैरत में हैं। नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्य भी हैरान में है। नगर निगम कर्मचारियों में यह भी यह चर्चा का विषय रहा। जिस तरह से टकराव दोनों ओर से था उससे लग नहीं रहा था कि यह शांत होगा। अब जिस तरह से शांत हुआ और ऐसा लग रहा कि कुछ हुआ ही नहीं था, यह बात किसी को हजम नहीं नहीं हो रही। सब यह पता करने में लगे हैं कि आखिर यह हुआ कैसे।