प्रदेश में करोड़ों की दवाएं एक्सपायर होने के मामले में कई चिकित्साधिकारियों पर गाज गिर सकती है। जांच के दौरान प्रथमदृष्टया कॉरपोरेशन और चिकित्सा अधिकारियों के बीच समन्वय का अभाव पाया गया है। इस मुद्दे पर पत्रावलियों का मिलान किया जा रहा है।
तीन दिन पहले उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित वेयर हाउस में छापा मारा था। इस दौरान यहां 16 करोड़ 33 लाख की एक्सपायर दवाएं मिली। मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। यह कमेटी जांच में जुटी है। सूत्रों का कहना है कि जांच कमेटी ने पत्रावलियां तलब कर उनकी पड़ताल शुरू कर दी है। इस दौरान कॉरपोरेशन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय का अभाव पाया गया है।
कई जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों ने दवाओं की डिमांड भेजी। लेकिन दवाएं नहीं पहुंचने पर दोबारा पूछने तक की जरूरत नही समझा। इसी तरह कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने भी हर स्तर पर लापरवाही बरती हैं। ऐसे में जांच टीम जिलेवार दवाओं की आपूर्ति में हुई लापरवाही को लेकर जिम्मेदारी तय कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि जांच के दायरे में चिकित्साधिकारियों के साथ ही कई मुख्य चिकित्साधिकारी भी आएंगे। क्योंकि उन्होंने दवा आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।
जिन अस्पतालों में दवाएं खत्म हो गई, वहां दोबारा उपलब्ध कराने में रूचि नहीं ली गई। सिर्फ कॉरपोरेशन को चिट्ठी भेज कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। दूसरी तरफ कॉरपोरेशन में खरीद मामले में भी कई तरह की गड़बड़ी मिलने की आशंका है। क्योंकि कई ऐसी भी दवाएं एक्सपायर्ड हुई हैं, जिनकी तत्कालिक तौर पर डिमांड नहीं थी। इसके बाद भी उन्हें मनमानी तरीके से खरीद लिया गया। ऐसे में ये दवाएँ एक्सपायर हो गईं।