दहेज में गाड़ी न मिलने पर पत्नी और चार साल की बच्ची की जलाकर हत्या करने के आरोपी पति अजय प्रकाश सिंह को बरी करते हुए एडीजे मधु डोगरा ने आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता के आरोपों में दोषी ठहराकर दस साल की सजा सुनाई है। अजय प्रकाश को 55 हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी रही सास राजलक्ष्मी और देवर संजय प्रकाश सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
अजय प्रकाश ने घटना की सूचना मिलने के बाद भी पत्नी और बेटी को बचाने के लिए दरवाजा नहीं तोड़ा और न ही कोई प्रयास किया। इससे उसकी आपराधिक मंशा का पता चलता है। कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपी देवर संजय और सास राजलक्ष्मी की ओर से मृतका को प्रताड़ित करने का कोई साक्ष्य फाइल पर नहीं है। आरोपी अजय प्रकाश ने मृतका के साथ लगातार मानसिक और शारीरिक क्रूरता की। इसके कारण तृप्ति ने आहत होकर अपने और पुत्री पर मिट्टी का तेल डालकर आत्महत्या कर ली।
आरोपियों की मांग पर वादी के पिता ने डेढ़ लाख रुपये तो दे दिए, लेकिन अल्टो की मांग पूरी नहीं कर पाए। आरोप लगाया गया कि 25 फरवरी को अल्टो कार की मांग पूरी न हो पाने पर पर दिन में तृप्ति और उसकी बेटी आयुषी पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना की और आरोपी पति अजय प्रकाश सिंह, सास राजलक्ष्मी सिंह तथा देवर संजय प्रकाश सिंह के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।