चारबाग रेलवे स्टेशन से रवाना हुई लखनऊ मेल आलमबाग गेट के पास दो टुकड़ों में बंट गई। कप्लर खुल जाने की वजह से इंजन बोगियों को पीछे छोड़कर रवाना हो गया।
इसका आभास होने पर दुर्घटना की आशंका से यात्रियों में अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में रेलवे अधिकारियों को सूचना दी गई, इसके बाद इंजन को दोबारा बोगियों से जोड़कर ट्रेन को रवाना किया गया।
मामला बृहस्पतिवार रात का है। लखनऊ से दिल्ली जाने वाली ट्रेन संख्या 12229 लखनऊ मेल चारबाग रेलवे स्टेशन से रात 10.15 बजे रवाना हुई। ट्रेन कुछ दूरी तय करने के बाद रात 10.36 बजे आलमबाग गेट के पास पहुंची। यहां इंजन बोगियों से कट गया।
चलती ट्रेन में इंजन बोगियों को पीछे छोड़कर करीब 100 मीटर आगे निकल गया। जब बोगियों की रफ्तार कम हुई तो यात्रियों ने बोगियों से बाहर झांका तो इंजन नजर नहीं आया। इससे यात्रियों में अफरातफरी मच गई।
अफसर बोले, डिकप्लिंग की वजह से हुआ ऐसा
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लोको पायलट को इंजन लेकर आगे बढ़े महज एक मिनट ही हुआ होगा कि उसे पीछे बोगियां नजर नहीं आईं। उधर चारबाग रेलवे स्टेशन प्रशासन को लखनऊ मेल के इंजन का बोगियों से अलग होने की सूचना मिली।
डीआरएम कार्यालय में तैनात आला अधिकारियों को सूचित किया गया। लोको पायलट ने इंजन को रिवर्स लिया और बोगियों तक लाया। इसके बाद ट्रेन को बोगी से जोड़ा गया और रात 10.54 बजे रवाना कर दी गई।
इस पूरी कवायद से ट्रेन 21 मिनट देरी की शिकार हुई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि डिकप्लिंग की वजह से ऐसा हुआ। चूंकि ट्रेन की स्पीड कम थी और सही समय पर सूचना मिलने से स्थिति को कंट्रोल कर लिया गया।
...तो बोगियों के डिरेल होने से हो सकता था बड़ा हादसा
डेमो
आलमनगर गेट के पास कप्लर खुलने से लखनऊ मेल का इंजन आगे निकल गया। ऐसे में बोगियां डिरेल होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। लखनऊ मेल जिस वक्त आलमनगर गेट से गुजरी, उस वक्त ट्रेन की रफ्तार कम बताई जा रही है।
हालांकि, यात्रियों ने बताया कि जब कप्लर अलग हुआ, उसके कुछ सेकंड बाद ही उन्हें बोगियों की रफ्तार कम होती दिखी। जब बाहर झांका तो बोगी रुकती दिखी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन की रफ्तार कम थी, इसलिए ऐसा होने की गुंजाइश न के बराबर थी।
जब शताब्दी की आधी बोगियां रह गई थीं स्टेशन पर
23 अप्रैल, 2016 को लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ट्रेन संख्या 12003 शताब्दी एक्सप्रेस का कप्लर भी खुल गया था, जिससे आधे कोच प्लेटफॉर्म पर ही छूट गए थे और आधी बोगियों के साथ ट्रेन रवाना होने लगी थी।
हालांकि बाद में रेलवे अधिकारियों ने बताया था कि कोच नम्बर सी-7 में तकनीकी खराबी आ गई थी। इस वजह से उसे ट्रेन से अलग किया गया था। कपलिंग हटाकर कोच को यार्ड में ले जाने केलिए शताब्दी को रवाना किया गया है।