राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर ने कहा कि सामाजिक सद्भाव के अभाव में राष्ट्र व समाज कमजोर हो जाता है। उन्होंने कहा कि संघ समाज में समरसता व सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए कार्य कर रहा है। संघ ने समाज से आह्वान किया है कि मंदिर, श्मशान और कुआं सभी के लिए एक होना चाहिए।
आरएसएस के सामाजिक सद्भाव विभाग की ओर से रविवार को विश्व संवाद केंद्र में ''राष्ट्रीयता— सामाजिक सद्भाव — विमर्श'' विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कृपाशंकर ने कहा कि राष्ट्रीयता कमजोर होती है तो क्षेत्रवाद, प्रांतवाद, जातिवाद, परिवारवाद व व्यक्तिवाद पनपता है। वहीं यदि समाज में राष्ट्रीयता का भाव प्रबल होता है तो राष्ट्र की जय—जयकार होती है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के अभाव में समाज में कुरीतियां बढ़ीं।
संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख नरेंद्र सिंह ने कहा कि समाज का पारस्परिक सद्भाव बिगड़ा है। समाज में सद्भाव बनाने और समाज में आई विकृतियों को दूर करने के लिए चिंतन मनन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र विरोधी शक्तियों को ईश्वर,धर्म और परिवार इन तीन शब्दों से नफरत है। सामाजिक सद्भाव बनाने में हमारे परिवार की महती भूमिका है।
विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष नरेंद्र भदौरिया ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी अंतिम व्यक्ति के उत्थान में अपना जीवन लगाया। संगोष्ठी को राष्ट्रीय भागीदारी आंदोलन के प्रमुख पी.सी.कुरील, बौद्ध भिक्षु सुमित पाल,राष्ट्रधर्म पत्रिका के प्रभारी सर्वेश द्विवेदी, अमृता यादव, सुलोचना मौर्य और एडवोकेट ज्योत्सना श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया।