यह दीगर है कि लखनऊ स्मार्ट सिटी की दौड़ में पिछड़ गया है, लेकिन यहां विकास हुआ है, लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है और यह सब संभव हुआ है बढ़ती जनभागीदारी के चलते। राजधानी के लोगों में जागरूकता बढ़ी है और इसी का नतीजा है कि वह न केवल योजनाओं का लाभ लेने लगे हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर शिकायतें भी करने लगे हैं।
इसी सक्रियता ने लखनऊ को वार्षिक सर्वे (एएसआईसीएस) में 21वें पायदान से सीधे दसवें पायदान पर पहुंचा दिया है। यह सर्वे 83 मानकों के आधार पर तैयार किया गया है।
जनाग्रह सेंटर फॉर सिटीजनशिप एंड डेमोक्रेसी ने देश के 18 राज्यों में यह सर्वे किया। इसमें लखनऊ ने 10 पॉइंट केस्केल पर 3.4 अंक हासिल किए हैं, जबकि पिछले वर्ष 3.2 अंक थे।
इस सालाना सर्वे का लक्ष्य यह जानना होता है कि शहर का प्रशासन अपने नागरिकों के जीवन स्तर में लंबे समय के दौरान सुधार लाने के लिए क्या क्षमताएं रखता है। इसमें पहले स्थान पर जहां मुंबई रहा तो वहीं उत्तर प्रदेश से एक और शहर कानपुर ने आठवां स्थान हासिल किया है।
कानपुर पिछले वर्ष 14वें स्थान पर था। सर्वे के अनुसार है, पिछले वर्ष कानपुर ने जहां 3.9 अंक हासिल किए थे, इस दफा 3.6 अंक ही मिल सके हैं। बाकी शहरों का भी प्रदर्शन उससे खराब रहने से शहर को छह स्थानों का उछाल मिला। सर्वे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी शहरों द्वारा हासिल अंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंदन या न्यूयॉर्क को हासिल अंकों से बेहद कम हैं जो क्रमश: 9.4 और 9.7 थे।