लखनऊ में तस्करी के सोने को खपाने का एक सिंडीकेट है। इस सिंडीकेट में सोने को बेचने, खरीदने एवं मध्यस्थता करने वाले शामिल होते हैं। नेपाल, कोलकाता आदि से आने वाले तस्करी के सोने पर कस्टम ड्यूटी व सेस का जो पैसा बच जाता है वह बेचने, खरीदने एवं मध्यस्थता करने वालों में बंट जाता है।
चार रास्तों से सोने की आवक
सूत्रों के मुताबिक तस्करी का सोना नेपाल, कोलकाता, जयपुर व दिल्ली के रास्ते लखनऊ पहुंच रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा आवक नेपाल एवं कोलकाता के रास्ते से हो रही है।
ऐसे बना रहे तस्करी के सोने को खरा
बिस्किट की शक्ल में आने वाले तस्करी के सोने पर बैंक का नाम और फर्जी नंबर दर्ज कर देते हैं। ग्राहक को झांसा देने के लिए यह सब किया जाता है। यह काम रिफाइनरी में होता है।
छापे से बैंक से सोने की खरीद बढ़ी
लखनऊ सराफा एसोसिएशन के वरिष्ठ महामंत्री प्रदीप कुमार अग्रवाल बताते हैं कि तस्करी के सोना के खिलाफ जब से आयकर के छापे बढ़े हैं, बैंकों से खरीद बढ़ी है। वहीं, लखनऊ महानगर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष वर्मा कहते हैं, तस्करी का सोना बाजार में पहुंचने से ईमानदार लोगों का कारोबार चौपट हो गया है। बाजार में कुछ कारोबारी सस्ते गहने बेचते हैं। वे ऐसा इसलिए कर पाते हैं, क्योंकि सोना तस्करी का होता है।
फैक्ट फाइल: सोना पर कितना टैक्स
12.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी
2.5 फीसदी सेस
3.00 फीसदी जीएसटी