हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग से उस आपत्ति पर विचार करने के लिए कहा है जिसमें निकाय चुनाव में आरक्षण संबंधी अध्यादेश के साथ ही पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को चुनौती दी गई है। मामले में अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होगी।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश सुहैल खां की तरफ से मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा नगर पंचायत सीट आरक्षित किए जाने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची का कहना था कि इस सीट को लेकर इससे पहले भी दाखिल की गई याचिका को बिना गौर किए खारिज कर दिया गया था।
कहा कि नगर पालिका अधिनियम में पहले पुराने नियम के तहत राज्य स्तर पर सीटों का आरक्षण तय करने का नियम था। अब अध्यादेश संख्या-3 के तहत नियम संशोधित कर नए नियम के तहत मंडल व जिला स्तर पर आरक्षण निर्धारित किया गया है। यह कानून की मंशा के खिलाफ है। याचिका में उप्र. राज्य स्थानीय निकाय समर्थित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर भी यह कहते हुए सवाल उठाया गया है कि इसमें ओबीसी के राजनीतिक पिछड़ेपन का कोई अध्ययन नहीं किया गया है। सिर्फ पुराने आंकड़े ही नए रूप में पेश किए गए हैं। यह न्यायोचित नहीं है। याचिका में अध्यादेश समेत आयोग की रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग कोर्ट से की गई है।