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UP News: लखनऊ में 100 वर्ष से अधिक के सिर्फ 180 मतदाता, ग्रामीण इलाकों में लोकतंत्र के बुजुर्ग प्रहरी ज्यादा

Mon, 13 Apr 2026 09:09 AM IST
Bhupendra Singh समीउद्दीन नीलू, अमर उजाला, लखनऊ

सार

राजधानी में 100 वर्ष से अधिक के सिर्फ 180 मतदाता हैं। ग्रामीण इलाकों में लोकतंत्र के बुजुर्ग प्रहरी ज्यादा हैं। 54 शतायु मतदाताओं के साथ बीकेटी विधानसभा अव्वल है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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बुजुर्ग मतदाता। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एसआईआर के बाद राजधानी लखनऊ की प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 100 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं यानी लोकतंत्र के बुजुर्ग प्रहरियों की मौजूदगी अलग ही तस्वीर पेश करती है। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल 180 शतायु मतदाता हैं। शहर के मुकाबले इनकी संख्या ग्रामीण और बाहरी विधानसभा क्षेत्रों में अधिक है।

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सबसे अधिक 54 शतायु मतदाता बीकेटी में हैं। इसके बाद मलिहाबाद (35) और सरोजनीनगर (30) का स्थान आता है। मोहनलालगंज में 17 मतदाता शतायु हैं। ये सभी क्षेत्र ग्रामीण या अर्ध-शहरी हैं, जहां सामाजिक जुड़ाव और पारंपरिक जीवनशैली अब भी मजबूत मानी जाती है। 

इसके उलट शहर के प्रमुख इलाकों में इन बुजुर्ग प्रहरियों की संख्या काफी सीमित है। लखनऊ पश्चिम में सिर्फ चार, कैंट में छह और सेंट्रल में सात मतदाता ही 100 वर्ष से अधिक आयु के हैं। लखनऊ उत्तर (12) और लखनऊ पूर्व (15) में भी यह संख्या बहुत अधिक नहीं है।

शहर में कम बुजुर्ग आबादी के कई कारण 

जानकारों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बदलती जीवनशैली, छोटे होते परिवार और पलायन जैसे कारणों से बुजुर्ग आबादी का अनुपात कम नजर आता है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में लोग मूल स्थान से जुड़े रहते हैं। इससे वहां शतायु मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रहती है। 

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खास बात यह है कि संख्या कम होने के बावजूद यह वर्ग लोकतंत्र के लिए बेहद अहम है। एक सदी से ज्यादा जीवन का अनुभव रखने वाले ये वोटर न केवल कई मतदान प्रक्रिया के साक्षी रहे हैं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं को जीवित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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