पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्रीन फ्यूल उपलब्ध कराने के लिए कंपनी एम्बीशनविन ब्रेवरेजेस सरोजनीनगर और सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली जमीन पर एथेनॉल प्लांट लगाएगी। इसमें गन्ने-धान की भूसी, गन्ने के रस, चीनी के घोल, जौ, मक्का व अन्य अनाजों से एथेनॉल तैयार किया जाएगा। प्रदेश में इस तरह के पहले प्लांट के लिए इन्वेस्ट यूपी के तहत एमओयू हो गया है। इससे करीब 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
प्लांट में रोजाना 750 किलोलीटर एथेनॉल बनेगा। इसका इस्तेमाल वैकल्पिक ऊर्जा के तहत एथेनॉल बेस्ड गाड़ियों में होगा। साथ ही डिस्टलरी आदि प्रोजेक्ट भी लगाए जाएंगे। इसका विस्तार लखनऊ के साथ अन्य जनपदों में किया जाएगा। प्लांट में रोजाना 60 मेगावॉट ऊर्जा का भी उत्पादन होगा। इसमें बिजली के साथ बायोमॉस व प्राकृतिक गैस का उत्पादन शामिल होगा।
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कंपनी के प्रबंध निदेशक अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि प्रोजेक्ट पर 2500 करोड़ की अनुमानित लागत आएगी। जनवरी के अंतिम सप्ताह में शिलान्यास के बाद मार्च से प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा। कंपनी जल्द पूर्वांचल में भी ऐसा प्लांट लगाने की कार्ययोजना बना रही है। इन्वेस्ट यूपी के तहत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रथमेश कुमार ने प्रदेश सरकार की ओर से करार किया।
इन्हें मिलेगा रोजगार
एमओयू के अनुसार प्लांट शुरू होने पर हाईस्कूल, इंटर, आईटीआई, तकनीकी डिप्लोमा, स्नातक, परास्नातक, बीटेक के छात्रों को नौकरी मिलेगी। 30 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में देगा योगदान
प्लांट की डीपीआर के अनुसार पहले गन्ने के रस से चीनी बनती थी। अब इसे सीधे एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। एथेनॉल को पेट्रोल व डीजल में मिलाकर पेट्रोलियम पदार्थों का आयात कम कर विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद मिलेगी। अभी तक केवल पांच प्रतिशत एथेनॉल पेट्रोल व डीजल में मिलाया जाता है। इस प्लांट से बायो एथेनॉल के उत्पादन से मदद मिलेगी। प्लांट के कृषि अपशिष्ट से खाद भी तैयार की जाएगी, जो खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाएगी। किसान अपनी उपज के अपशिष्ट प्लांट को बेचकर आय में इजाफा भी कर सकते हैं।