तीन-तीन के गिरोह में करते थे ऑटो चोरी
एसीपी विभूतिखंड स्वतंत्र सिंह के मुताबिक यह गिरोह दो तरह से काम करता था। एक ऑटो चोरी करने के बाद उसके फर्जी पेपर तैयार कर बेचते थे। दूसरा कबाड़ की गाड़ियों को खरीदकर जाली नंबरों व पेपर के जरिए बेचते थे।
एसीपी स्वतंत्र सिंह के मुताबिक चोरी करने के दौरान तीन-तीन का गिरोह होता था। दो सदस्य बतौर ग्राहक ऑटो बुक कराते थे। इसके बाद घर से कुछ दूर पहले उतर जाते। इसके बाद ऑटो चालक को झांसे में डालकर सामान उठवाकर घर तक जाते।
वापस आने से पहले तीसरा सदस्य ऑटो लेकर भाग जाता था। इसके बाद दिव्यांग सदस्य वहां से गुजरता और पीड़ित व सहयोगी को दूसरी दिशा में ऑटो के जाने के बारे में जानकारी देकर भ्रमित कर देता।
साजिश के तहत चालक को एक से दो घंटे तक ऑटो की तलाश करवाने में लगे रहते। इसके बाद वहां से निकल जाते। इतने देर में उनके साथी ऑटो को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा देते।
15 सदस्यों का है जालसाजी का गिरोह
प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड संजय शुक्ला के मुताबिक जालसाजी करने वाले गिरोह में सदस्यों की संख्या करीब 15 है। जालसाजी के लिए कई चरण में काम करते थे। पहले चरण में 10 से 15 साल का समय पूरा करने के बाद निष्प्रयोज्य घोषित हो चुकी ऑटो की तलाश करते।
इसे नीलाम होने के बाद कबाड़ी के पास से खरीदते थे। उसे ठीक करने के बाद फर्जी नंबर की तलाश करते। इसके लिए भी पुराने नंबरों की सीरिज खंगाला जाता था। इनके निशाने पर वह नंबर होते थे जिसे आरटीओ ने ब्लैक लिस्टेड कर दिया हो।
इसके बाद आरटीओ के कर्मचारियों से मिलकर फर्जी नंबर व उसके पेपर की स्कैन कॉपी निकाल लेते थे। जिसके आधार पर नया जाली पेपर तैयार कर ऑटो बेच देते हैं।
आरोपियों ने पूछताछ में कई साल से यह काम करने की बात कुबूल की है। वेब चौकी प्रभारी अनिल सिंह के मुताबिक पुलिस के पास अब तक 60 गाड़ियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने की जानकारी जालसाजों ने दी है।
पुलिस ने इन गाड़ियों के बारे मे जानकारी जुटा चुकी है। इन गाड़ियों को फर्जी नंबर पर संचालित किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्यों द्वारा 10 से 12 हजार में कबाड़ की दुकान से ऑटो खरीदा जाता था।
जिनको तैयार करने के बाद 50 से 60 हजार रुपये में बेच दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह में हरदोई के आरटीओ विभाग के कुछ कर्मचारियों के नाम भी सामने आए हैं। जिनकी तलाश की जा रही है।
शहर केइन रूटो पर चलती है चोरी की ऑटो
पुलिस के मुताबिक इस तरह के फर्जी तरीके से खरीदे गए ऑटो शहर के कुछ हिस्सों में ही संचालित करने केलिए कहा जाता था। इसके लिए नहरिया से दुबग्गा, नहरिया से राजाजीपुरम, चारबाग से कैसरबाग, इंदिरानगर से बीबीडी, बीबीडी से गोमतीनगर रूट प्रमुख है।
इसके अलावा कृष्णानगर, सरोजनीनगर, आशियाना, मोहनलालगंज इलाके में ऑटो संचालित किये जाते हैं। पुलिस शहर में चलने वाले ऑटो के नंबरों की सूची तैयार कर रही है। जिनकी जांच कराई जाएगी।
दो हजार में आरटीओ से खरीदते थे पेपर
जालसाजों के पास से बरामद दस्तावेजों की जांच की गई तो पता चला कि कागज पूरी तरह से सही है। उनके पास से आरटीओ में प्रयोग किए जाने वाला पंजीकरण पेपर मिला है। जिस पर शासन का लोगो लगा हुआ है। जालसाज इसे स्कैन करते थे।
इसके बाद बार कोड व मुहर लगाते थे। फिर उसे एक दम असली बनाकर गाड़ी खरीदने वाले को देते थे। पुलिस के मुताबिक आरटीओ के कर्मचारी असली पंजीकरण पेपर दो हजार से तीन हजार रुपये में बेचते थे। पुलिस ऐसे कर्मचारियों की तलाश कर रही है।
जालसाजों के गिरोह का खुलासा करने वाली टीम को इनाम
पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने इस जालसाज व चोरों के गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को 20 हजा रुपये का इनाम दिया है। इस टीम में प्रभारी निरीक्षक संजय शुक्ला, एसआई अनिल कुमार सिंह, संजय कुमार शुक्ला, सुनील कुमार मौर्य, अजीत कुमार, हेड कांस्टेबल अनिल कुमार उपाध्याय, कांस्टेबल संदीप कुमार जायसवाल, मनोज कुमार व योगेश कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।