नौकरी जाने पर शुरू किया ठगी का खेल
पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि वह वर्ष 2004 से सितंबर 2024 तक भोपाल में पारस महल ज्वैलर्स के यहां नौकरी करता था। विवाद होने पर उसने नौकरी छोड़ दी। 2024 की दीपावली के समय रिश्तेदार अखिलेश के माध्यम से उसकी मुलाकात अमित से हुई। उसने रोहित लोधी से मिलवाया। रोहित ने बताया कि वह बैंक खाते किराये पर लेकर उनमें साइबर ठगी की रकम मंगवाता है।
इसके लिए प्रति खाता 10 हजार रुपये एडवांस देता है। इसके अलावा जितनी रकम खाते में आती है, उसके हिसाब से कमीशन देता है। प्रदीप ने रोहित को 10 बैंक खाते दिए। जनवरी और फरवरी में रोहित ने इनमें साइबर ठगी की रकम मंगवाई। इसके एवज में प्रदीप को पैसे मिले। इसके बाद वह रोहित के पास आने-जाने लगा।
बैंक खातों की जानकारी देता था आरोपी
प्रदीप ने बताया कि वह बैंक खातों के एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, किट की जानकारी रोहित को देता था। आरोपी ने विदिशा, भोपाल, रायसेन व अन्य जिलों में खाते खुलवाए थे। वह डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन गेमिंग, शेयर ट्रेडिंग, होटल रेटिंग फ्रॉड से आने वाली रकम को एटीएम से निकालकर रोहित को सीडीएम मशीन से भेजता था। इसका भी कमीशन मिलता था। आरोपी ने बताया कि गिरोह में कई और लोग भी शामिल हैं, जो तकनीकी काम देखते हैं। एसटीएफ इनका पता लगा रही है।