राजधानी में कोविड का प्रकोप बढ़ने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना हुआ है। सरकारी अस्पतालों में अभी तक कोविड हेल्पडेस्क तक नहीं बनाई गई है। अहम बात यह है कि जांच के लिए काउंटर तक नहीं है। ऐसे में लक्षण वाले लोग जांच के लिए भटक रहे हैं। मरीजों की आरटीपीसीआर जांच के लिए नमूना तक नहीं भेजा जा रहा है।
शहर में कोविड के अब तक 64 मरीज मिल चुके हैं। इनमें सक्रिय मामले 36 हैं। इसके बाद भी अस्पतालों में जांच के इंतजाम पुख्ता नहीं है। लोगों को जांच के लिए निजी केंद्र जाना पड़ रहा है। बलरामपुर, सिविल, लोकबंधु, रानी लक्ष्मीबाई समेत अन्य अस्पतालों में कोविड हेल्पडेस्क नहीं बनी है। लक्षण वाले लोगों का रैपिड टेस्ट कराया जा रहा है। रैपिड टेस्ट में रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। नतीजा आरटीपीसीआर के लिए सैंपल तक नहीं भेजा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है रैपिड जांच प्रामाणिक नहीं है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि अस्पतालों में जांच काउंटर व हेल्पडेस्क बनाने के लिए महानिदेशालय से गाइडलाइन नहीं आई है। नए दिशा-निर्देश मिलते ही कोविड हेल्पडेस्क यूनिट क्रियाशील कर दी जाएगी।