आशियाना स्थित लोकबंधु अस्पताल पिछले कुछ साल में तेजी से विकसित हुआ है। यहां वेंटिलेटर के साथ ही कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसकी वजह से यहां ओपीडी के साथ ही भर्ती मरीजों की संख्या भी काफी रहती है। सोमवार रात आग लगने के समय यहां दो सौ से ज्यादा मरीज भर्ती थे। इनमें से कुछ काफी गंभीर भी थे। आग लगने के बाद इन मरीजों तीमारदारों की हालत खराब हो गई। जान बचाने के लिए भर्ती हुए मरीज आग लगने के बाद जान बचाने की कोशिश करते नजर आए।
अस्पताल में पिछले 20 दिन से भर्ती बाराविरवा निवासी नीलम गुप्ता के पति कुलदीप ने बताया कि उनकी पत्नी हड्डी विभाग में भर्ती थीं। पत्नी के कूल्हे का ऑपरेशन हुआ था। पहले कुछ चहल पहल सुनाई दी। जानकारी करने पर पता चला कि आग गई है। ऐसे में पत्नी को किसी तरह शिफ्ट करवा पाए। घबड़ाहट में पत्नी कहने लगीं कि आप निकलो। हालांकि उनको निकालने में सफलता मिल गई। मेडिसिन वार्ड में भर्ती राजवती आहूजा आग के बाद बाहर निकलीं तो कहने लगीं कि यहां इलाज नहीं कराना है। हड्डी वार्ड में भर्ती विनोद गुप्ता ने बताया कि दो महीने से हड्डी वार्ड में भर्ती हैं। अब देखते है कहां जाएं।
200 मरीज शिफ्ट करने में लगा डेढ़ घंटा
अस्पताल में आग की घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ा। यहां भर्ती 200 मरीजों को में से छह गंभीर को केजीएमयू के आईसीयू में शिफ्ट किया गया। बाकी मरीजों को बलरामपुर, सिविल और आलमबाग के 50 बेड हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया। मरीजों को दूसरे संस्थानों में शिफ्ट किया गया। बड़ी संख्या में 102 व 108 सेवा की एम्बुलेंस को लगाया गया।