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लखनऊ अग्निकांड: चार अधिकारी निलंबित, बिल्डिंग मालिक, कोचिंग संचालक समेत चार गिरफ्तार; अवैध है इमारत

Tue, 23 Jun 2026 06:58 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Lucknow fire: लखनऊ अग्निकांड में सरकार लगातार हरकत में है। इस हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल का मुआयना किया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगंज अग्निकांड को लेकर देर रात उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें दोषियों को चिह्नित करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया। वहीं, अलीगंज थाने में छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इनमें से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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सीएम के निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ के एडीजी जोन प्रवीण कुमार सदस्य हैं। जांच दल सात दिन में रिपोर्ट सीएम को सौंपेगा। वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रथम दृष्ट्या दोषी पाए गए गौरव कुमार, एक्सेन कलेक्शन (बिजली विभाग) जानकीपुरम, कमलेंद्र कुमार सिंह, एफएसएसओ (फायर विभाग) इंदिरा नगर, अनिल कुमार, एई, एलडीए और प्रमोद पांडे, जेई-एलडीए के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।

सोमवार रात पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक मदेयगंज निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, अलीगंज निवासी पेट शॉप के मालिक रामकृष्ण उपाध्याय, एनिमेशन सेंटर के संचालक बालागंज निवासी तूशॉक कृष्णा जायसवाल और किरायेदार सुरेश कुमार शाहू निवासी केशवनगर, मड़ियांव को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, एफआईआर में नामजद आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला की तलाश जारी है।
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किसी दोषी को नहीं बख्शेंगे
संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था बबलू कुमार के मुताबिक पुरनिया चौकी इंचार्ज शुभम तिवारी की तहरीर पर छह नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं व 6/10 उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा में केस दर्ज किया गया है। मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

हादसे के छह घंटे बाद एलडीए ने दो इंजीनियरों को किया निलंबित, जांच समिति बनाई

अलीगंज में अग्निकांड में 15 लोगों की जान जाने के करीब छह घंटे बाद एलडीए ने दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है और उनकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। हालांकि अभी कई और बड़ों पर गाज गिरनी है लेकिन उन पर अभी नरमी बरती जा रही है। इनके खिलाफ कार्रवाई के गठित की गई पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद की जाएगी । समिति तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।

एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया अलीगंज में अवैध रूप से बनी बिल्डिंग के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बरतने के मामले में अभी सहायक अभियंता अनिल कुमार और अवर अभियंता प्रमोद कुमार पांडेय को निलंबित कर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। इनके अलावा अन्य पर भी कार्रवाई की जाएगी । इन दो पर अभी कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि यह अलीगंज इलाके में 2016 से सबसे अधिक समय तक तैनात रहे हैं।

इसलिए शुरुआती जांच के बाद इनको निलंबित किया गया है । बाकी जो और दोषी है उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्य समिति भी गठित कर दी गई है । यह तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। समिति अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा की अध्यक्षता में गठित की गई है। इसमें मुख्य नगर नियोजन के के गौतम, मुख्य अभियंता मानवेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत यांत्रिक मनोज सागर और अलीगंज के संपत्ति अधिकारी व विशेष कार्य अधिकारी रवि नंदन सिंह को सदस्य बनाया गया है।

पूरी तरह अवैध थी हादसे वाली बिल्डिंग, 16 इंजीनियरों-अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

40 मिनट देरी से पहुंची दमकल की टीम। - फोटो : अमर उजाला
 अलीगंज में जिस बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान गई वह अवैध थी। एलडीए से इसका मानचित्र आवासीय पास कराया गया और उसका उपयोग व्यावसायिक किया जा रहा था। आग की घटना के बाद जांच में यह बात सामने आई है। इस मामले में एलडीए के 16 इंजीनियरों और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। इसको लेकर एलडीए की ओर से जांच शुरू कर दी गई है।

हादसे बाद यह भी सामने आया कि बिल्डिंग का निर्माण भी मानकों के विपरीत किया गया था। उसमें आग से बचाव को लेकर भी कोई उपाय नहीं किया गया था। बिल्डिंग में आग से बचाव को लेकर सेट बैक भी नहीं छोड़ा गया था। ऐसे में बिल्डिंग पूरी तरह मानकों के विपरीत बनाई गई थी। एलडीए के रिकार्ड के तहत अलीगंज सेक्टर डी में मकान संख्या एमएस-103 की जमीन पर बनी जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ वह जुलाई 1980 में विजय कुमार सहाय पुत्र रामेश्वर सहाय को आवंटित की गई थी। जिसका प्लाॅट एरिया 1992 वर्ग फीट है।

साल 2005 में यह जमीन ने वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला को साल 2013 में बेच दिया। इसके बाद उन्होंने 2014 में उसको एलडीए में अपने नाम दर्ज भी करा लिया। नामांतरण कराने के बाद वीरेंद्र प्रताप शुक्ला ने स्वत: मानिचत्र पास कराने की योजना में आवेदन किया और उसमें बताया कि वह वहां पर रहने के लिए घर बनाएंगे। इसके लिए उनकी ओर से शपथ पत्र भी दिया गया लेकिन किया उल्टा गया। बिल्डिंग का उपयोग आवासीय की बजाए कामर्शियल किया गया। वहां पर दुघर्टना के दौरान आग से बचाव किया जा सके इसके लिए सेट बैक भी नहीं छोड़ा गया।

दोषियों की पहचान को जांच शुरू

आवासीय मानचित्र पास कराने के बाद उसका उपयोग कामर्शियल में कैसे हुआ इसकी जांच के लिए एलडीए वीसी के निर्देश पर जांच हो रही है। इसमें प्रवर्तन विभाग से लेकर मानचित्र सेल का रिकार्ड जांच जाएगा। 2014 के बाद अब तक इस क्षेत्र में किन इंजीनियरों और अधिकारियों के पास निगरानी की जिम्मेदारी थी उनका ब्योरा जुटाया जा रहा है। शासन को भी इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में 16 इंजीनियरों और अधिकरियों पर गाज गिर सकती है।
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कोचिंग सेंटर में लगी आग, 15 छात्रों की मौत

बिल्डिंग की दीवार तोड़कर निकाले गए बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
अलीगंज स्थित एक बिल्डिंग में आग लगने से कोचिंग पढ़ने व एनीमेशन कोर्स करने वाले 15 छात्रों की जलकर मौत हो गई। कई छात्र गंभीर रूप से झुलस गए। जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूदे नौ छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ का दौरा छोड़कर वापस आए और घटनास्थल का मुआयना किया। रक्षामंत्री एवं राजधानी के सांसद राजनाथ सिंह भी लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं। शॉर्ट सर्किट और एसी का कंप्रेसर फटने के कारण आग लगने की आशंका जताई जा रही है।

अलीगढ़ के पुरनिया स्थित बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप की दुकान है। पहली मंजिल पर पेट शॉप मालिक का वेयरहाउस है। दूसरी मंजिल पर थ्री-डी एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और गेमिंग जोन के साथ 12वीं तक के विद्यार्थियों की कोचिंग चलती थी। पुलिस के मुताबिक दोपहर करीब ढाई बजे वेयरहाउस में अचानक आग लग गई। चंद मिनटों में आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई। बिल्डिंग में मौजूद कई लोग विकराल हुई आग के बीच घिर गए।

दूसरी व तीसरी मंजिल पर मौजूद छात्र भीतर ही फंस गए। सूचना पर पहुंची पुलिस और दमकल टीम के साथ एसडीआरएफ ने बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। करीब दो घंटे चले रेस्क्यू के दौरान 15 शव बाहर निकाले गए। वहीं कई झुलसे छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से कई की हालत गंभीर है। हादसे के वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री सभा छोड़ तुरंत वापस आए। उनके निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, डीजीपी राजीव कृष्ण, डीजी फायर सुजीत पांडेय, पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सेंगर समेत तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे। देर शाम तक राहत-बचाव कार्य जारी था।
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