फसल बेहतर लेने की चाह में किसान नादानी कर रहे हैं। प्रदेश भर में रासायनिक उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदेश के 15 जिले ऐसे हैं जहां नाइट्रोजन की ओवरडोज आने वाले समय में संकट खड़ा कर सकती है। मिट्टी और मानव दोनों के लिए ही यह अधिकता हानिकारक है। कृषि विभाग ने इन जिलों में सर्वे करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी है। कहा गया है किसानों को इस बाबत जागरूक करना ही होगा ताकि भविष्य की मुसीबत को रोका जा सके।
मानव स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक
अहम बात यह है कि किसान चाहे उर्वरक का कितना भी प्रयोग करें पौधे इसमें से 30 फीसदी यूरिया का उपयोग करते हैं। फसल की मांग से अधिक उपयोग में लाया गया नाइट्रोजन वाष्पीकरण और रिसाव के जरिए बेकार चला जाता है। नाइट्रोजन का अत्यधिक उपयोग जलवायु परिवर्तन और भूजल प्रदूषण को बढ़ावा देता है। यूरिया जमीन में रिस जाता है तथा नाइट्रोजन से मिलकर नाईट्रासोमाईन बनाता है जिससे दूषित पानी को पीने से कैंसर, रेड ब्लड कणों का कम होना और रसौलियाँ बनना जैसी बीमारियां होती हैं। डा. पाठक बताते हैं कि चूंकि डीएपी खाद रॉक फास्फेट के रूप में आता है जिसका शोधन कर फास्फोरस प्राप्त किया जाता है। शोधन के दौरान इसमें हैवी तत्व जैसे कोवाल्ट, कैडमियम और यूरेनियम आदि रह जाते हैं जिनके प्रयोग से मिट्टी तथा पानी दूषित होता है। मिट्टी बेकार होने की स्थिति में पहुंच जाती है।
मिट्टी की जांच कराएं
मृदा परीक्षण के लिए प्रदेश में तहसील व विकासखंड स्तर पर उप संभाग में प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। उनमें 12 बिंदुओं की जांच कराई जा रही है जिनमें। नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, बोरान आदि की मिट्टी की जांच कराई जाती है। किसानों को यह जांच कराकर देखना चाहिए है मिट्टी में किस तत्व की कमी है। उसी हिसाब से खेती में उर्वरक का प्रयोग करें। किसान इसमें कोताही बरतते हैं जिसका नुकसान उठाना पड़ता है। डा. पाठक के मुताबिक फसल बोने के 40 दिन बाद नैनो यूरिया का प्रयोग करें। यह कम लगता है और ज्यादा समय तक चलता है।
अन्य फसलों का भी सर्वे करें : एपीसी
कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह अन्य फसलों का भी सर्वे कर लें। उसी आधार पर कार्ययोजना तैयार किसानों को जागरूक करें। बताया जाए कि उर्वरक की कमी नहीं है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि मांग से ज्यादा इसका इस्तेमाल किया जाए। इससे नुकसान है।