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Lucknow : घोटाले और हेराफेरी से आयुष विभाग का है गहरा नाता, 1990 में हो चुका करोड़ों रुपये का ट्रेजरी घपला

Tue, 08 Nov 2022 04:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Lucknow : जानकारों का कहना है कि एफटीएफ की जांच में छात्रों से भी पूछताछ होगी। ऐसे में वे किन लोगों के जरिए निदेशालय पहुंचे और यहां काउंसलिंग में लगी एजेंसी के संपर्क में आए, इसका खुलासा हो सकता है। यही वजह है कि छात्रों के परिजनों में हलचल मची हुई है।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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प्रदेश के आयुष विभाग का घोटाले और हेराफेरी से गहरा नाता है। कभी आयुर्वेद में तो कभी होम्योपैथिक विभाग इस तरह के मामलों को लेकर सुर्खियों में रहता है। ताजा मामला आयुष के सभी विधा के कॉलेजों में दाखिले को लेकर सामने आया है।

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कई आयुर्वेदिक कॉलेजों में प्रधानाचार्य रहे प्रो. एसएन सिंह को वर्ष 2018 में निदेशक का चार्ज दिया गया। इस बीच झांसी से स्थानांतरित होकर आए प्रो. सुरेश चंद्र से वरिष्ठता को लेकर विवाद हुआ। कुछ समय बाद सुरेश चंद्र को निदेशक पाठ्यक्रम का चार्ज दिया गया लेकिन परीक्षा मामले में शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब दाखिला मामले में वह खुद निलंबित हो गए हैं। इससे पहले वर्ष 1990 में तत्कालीन निदेशक शिवराज सिंह को जेल जाना पड़ा था। तब आयुर्वेद निदेशालय में करोड़ों रुपये का ट्रेजरी घोटाला हुआ था।

पीजी की काउंसिलिंग में भी हेराफेरी की आशंका
आयुष कॉलेजों में यूजी ही नहीं पीजी कोर्स में दाखिले की काउंसिलिंग भी वी2 साल्यूशन प्रा. लि. ने कराई थी। ऐसे में नीट पीजी 2021 की काउंसिलिंग को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। उम्मीद है कि एसटीएफ इस काउंसिलिंग से जुड़े लोगों से पूछताछ कर सकती है। प्रदेश में दो सरकारी आयुर्वेद कॉलेज में पीजी पाठ्यक्त्रस्मों का संचालन हो रहा है जबकि पांच निजी कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्त्रस्म है।
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छात्रों से पूछताछ में खुलेगा राज
जानकारों का कहना है कि एफटीएफ की जांच में छात्रों से भी पूछताछ होगी। ऐसे में वे किन लोगों के जरिए निदेशालय पहुंचे और यहां काउंसलिंग में लगी एजेंसी के संपर्क में आए, इसका खुलासा हो सकता है। यही वजह है कि छात्रों के परिजनों में हलचल मची हुई है।

दिनभर कार्यालय में रहा सन्नाटा
आयुष कॉलेज दाखिला हेराफेरी मामले की वजह से सोमवार को आयुष कार्यालय खुला लेकिन नाम मात्र के लोग पहुंचे। कार्यालय के सभी अधिकारी व प्रभारी अधिकारी नदारद रहे। हालांकि मौजूद कार्मिक कुछ बताने को तैयार नहीं थे। यही हाल आयुर्वेद व यूनानी निदेशालय का भी रहा। यहां पहुंचने वाले छात्रों व कर्मचारियों को बाद में आने की बात कह कर लौटाया जा रहा था।

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