मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के लखनऊ समेत 19 जिलों में पाबंदी, जारी किया आदेश
माई सिटी रिपोर्टर
आम उपभोक्ता अब बिजली विभाग का सुपरविजन शुल्क देकर विद्युतीकरण नहीं करा पाएगा। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने लखनऊ समेत 19 जिलों में पाबंदी लगा दी है। निगम की ओर से कहा गया कि भंडार में अब किसी प्रकार की सामग्री का कोई अभाव नहीं है। इसलिए ऐसे विद्युतीकरण कार्य विभागीय सामग्री से कराएं जाए।
मध्यांचल निगम के निदेशक ( तकनीकी ) हरीश बंसल ने 12 सितंबर को इस आशय का आदेश जारी किया है। निदेशक ने मुख्य अभियंता लखनऊ मध्य, गोमतीनगर, जानकीपुरम, अमौसी, अयोध्या, रायबरेली, सीतापुर, बरेली, देवीपाटन के तहत आने वाले जिलों में अधिशासी अभियंताओं को पत्र भेजा है। इसमें कहा कि भंडार में सामग्री उपलब्ध होने के बाद भी वितरण खंडों के अधिशासी अभियंताओं के द्वारा सुपरविजन शुल्क के एस्टीमेट बनाए जा रहें हैं। इससे भंडार की बिजली सामग्री की खपत नहीं हो पा रही है। इसलिए अधिशासी अभियंता किसी भी दशा में सुपरविजन चार्ज के एस्टीमेट न बनाएं। निदेशक ने इस आदेश पर तत्काल अमल करने की भी चेतावनी दी है।
जानिए क्या है सुपरविजन चार्ज एस्टीमेट
ऐसे समझे, किसी बिल्डर को हाउसिंग सोसाइटी का विद्युतीकरण कराना है। उसके आवेदन पर जेई-एसडीओ सर्वे करने के बाद विद्युतीकरण की लाइन, ट्रांसफार्मर, पोल आदि पर खर्च होने वाली धनराशि का एक एस्टीमेट बनाकर बिल्डर को देते हैं। बिल्डर ऐसे एस्टीमेंट की धनराशि का 15 फीसदी सुपरविजन चार्ज करके विद्युतीकरण कार्य खुद करा लेता, जो बिजली विभाग के मुकाबले उसे सस्ता पड़ता है। बिजली विभाग के एस्टीमेट में तमाम तरह के ऐसे शुल्क शामिल होते, जिससे विभागीय विद्युतीकरण कार्य कराना महंगा पड़ता है।