जांच टीम करीब छह घंटे तक स्कूल रही। टीम ने डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) को कब्जे में ले लिया। शुरुआती फुटेज में मारने पीटने का आरोप सही पाया गया। चूंकि और भी गंभीर आरोप छात्राओं ने लगाए थे इसलिए जांच टीम फुटेज और गहनता से खंगाल रही है।
कुछ वीडियो भी बनाए गए हैं
सूत्रों के मुताबिक स्कूल में शिक्षकों के गुट बने हैं। जिन्होंने स्कूल को अखाड़ा बना रखा है। इसकी वजह से छात्राओं का काफी नुकसान हो रहा है। ये भी पता चला कि कुछ लोगों ने छात्राओं के फोन पर बातचीत करते हुए वीडियो बनाए हैं जिससे उनको परेशान किया जा सके। अधिकारियों ने इन आरोपरों को गंभीरता से लिया है।
शिक्षा विभाग के अफसर क्या करते रहे?
छात्राओं का उत्पीड़न काफी समय से हो रहा था। जब प्रताड़ना असहनीय हो गया तब उन्होंने डीएम से शिकायत की। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसर भी सवालों के घेरे में हैं। यदि छात्राओं को प्रताड़ित किया जा रहा था उनको भनक क्यों नहीं लगी? साफ है कि वह न तो इन स्कूलों की जांच-पड़ताल करते हैं और न ही उनकी निगरानी। छात्राओं की शिकायत ने इन अफसरों की लापरवाही भी उजागर कर दी है।
जांच समिति की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर वार्डन पर केस दर्ज कराया गया है। उनकी संविदा समाप्त करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। विस्तृत जांच की जा रही है। फाइनल जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।- विशाख जी, जिलाधिकारी