हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रिहायशी इलाके में मोबाइल टावर लगाए जाने के खिलाफ दाखिल एक याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पहले पारित एक आदेश के आधार पर मोबाइल टावर के रेडिएशन से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर की दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश एएस दत्त की जनहित याचिका पर दिया।
याची का कहना था कि उसके प्लॉट के बगल में लगे मोबाइल टावर और फोर-जी बेस ट्रांसमिशन स्टेशन को हटाया जाए। यह भी मांग थी कि मोबाइल टावर के रेडिएशन से होने वाले दुष्प्रभावों के बाबत टेलीकॉम विभाग को रिपोर्ट प्रकाशित करने का आदेश दिया जाए। कोर्ट ने पूर्व में आशा मिश्रा केस में दिए गए आदेश को उल्लिखित करते हुए याची की दलीलों को अस्वीकार कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित उक्त आदेश में कहा गया था कि ऐसा कोई प्रामाणिक वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है जिससे मोबाइल टावर के रेडिएशन से होने वाले नुकसान का प्रमाण मिल सके।