इसके बाद सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि दुष्कर्म व पाॅक्सो के मामलों में राज्य सरकार, पीड़िता व उसके परिवार को अर्थिक मदद मुहैया कराती है। उन्होंने अदालत को बताया कि दुष्कर्म के मामलों में पीड़िताओं के मुकरने के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में पीड़िता या उसके परिवार को अगर कोई मुआवजा मिला हो तो उसे वसूला जाना चाहिए। सरकारी वकील ने ऐसे केसों का हवाला दिया और कहा कि यह कानून का दुरुपयोग है। कोर्ट ने इस मुद्दे का सख्त संज्ञान लेकर कहा कि अगर पीड़िता पूरी तरह बयान से मुकर जाए और अभियोजन केस का समर्थन न करे तो ऐसे में पीड़िता को मिली मुआवजे की रकम वसूल किया जाना उचित है।
अदालत ने कहा कि सरकारी खजाने पर इस तरह भार नहीं डाला जा सकता, क्योंकि इसमें कानूनों का पूरी तरह दुरुपयोग होने की संभावना है। ऐसे में पीड़िता या उसके परिजनों को दिए गए मुआवजे की वसूली उन प्राधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए, जिन्होंने इसे दिया है। कोर्ट ने सरकार को यह कारवाई तीन माह में पूरी करने को कहा है। साथ ही आदेश के पालन को इसकी प्रति मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार को दिया है। मामले को अगस्त के दूसरे हफ्ते में सूचीबद्ध करने का आदेश देकर कोर्ट ने कहा अगली सुनवाई पर सरकारी वकील इसकी प्रगति रिपोर्ट पेश करेंगें।