इसके अनुसार, उत्तर प्रदेश में सरकारी खरीद के लिए टूटे और सिकुड़े दानों की अधिकतम सीमा 18 फीसदी तय की गई है, जो कि पूरे देश में 6 फीसदी लागू है। प्रत्येक दो प्रतिशत की राहत के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (2125 रुपये प्रति क्विंटल) के 1 प्रतिशत के चौथाई हिस्से की कटौती होगी। यानी, दानों में प्रति दो प्रतिशत टूटन और सिकुड़न पर मूल्य में 5.31 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कटौती की जाएगी।
यह है कटौती का फार्मूला
केंद्रीय मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि 6 प्रतिशत तक दानों के टूटे व सिकुड़े होने पर कोई कटौती नहीं होगी। 6-8 प्रतिशत तक टूटे व सिकुड़े होने पर 5.31 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती होगी। इसी तरह से 8-10 प्रतिशत तक टूटे व सिकुड़े होने पर 10.62 रुपये प्रति क्विंटल, 10-12 प्रतिशत पर 15.93 रुपये, 12-14 प्रतिशत पर 21.25 रुपये प्रति क्विंटल, 14-16 प्रतिशत पर 26.56 रुपये प्रति क्विंटल और 16-18 प्रतिशत तक दाने टूटे व सिकुड़े होने पर 31.87 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कटौती होगी। वहीं, 18 प्रतिशत से अधिक टूटन व सिकुड़न होने पर सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं खरीदा जाएगा।
चमक कम होने पर 5.31 रुपये प्रति क्विंटल होगी कटौती
गेहूं के दानों की चमक 10 प्रतिशत तक कम होने पर कोई कटौती नहीं होगी। 10-80 प्रतिशत तक चमक कम होने पर दाम में प्रति क्विंटल 5.31 रुपये की दर से कटौती होगी। बता दें कि भारत सरकार के मूल मानकों के अनुसार, चमक में कमी वाला गेहूं सरकारी खरीद केंद्रों पर स्वीकार नहीं किया जाता है। केंद्रीय मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि खराब क्वालिटी का जो भी गेहूं खरीदा जाएगा, उसे सामान्य गेहूं से अलग रखा जाएगा। अगर भविष्य में खराब क्वालिटी के गेहूं के मानक में कोई और विचलन देखने को मिलता है, तो उसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
खुले बाजार में गेहूं का मूल्य 2100-2200 रुपये प्रति क्विंटल
प्रदेश में किसानों से गेहूं खरीदने के लिए 7 एजेंसियों के 5900 केंद्र स्थापित किए गए हैं। एमएसपी 2125 रुपये प्रति क्विंटल घोषित की गई है। वर्तमान में खुले बाजार में भी गेहूं का मूल्य 2100-2200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।