- अमीनाबाद जैसे बाजारों में हर दिन हजारों गाड़ियां आती हैं। यहां एक ही भूमिगत पार्किंग है, जो वाहनों के दबाव के सामने नाकाफी है। ज्यादातर गाड़ियां सड़क पर खड़ी होती हैं। यहां पर विकल्पहीनता के कारण गाड़ियों को उठाने का अभियान मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
- कैपिटल तिराहे के पास सड़क पर डिवाइडर के दोनों ओर रसूखदार नेताओं की गाड़ियां खड़ी रहती हैं, इनको हटाना भी आसान नहीं होगा।
- कपूरथला चौराहा के पास कोई पार्किंग नहीं। यहां रोजाना सैकड़ों गाड़ियां आती हैं और सड़क पर ही खड़ी होती हैं। पहले भी यहां कई बार वाहनों को हटाने को लेकर व्यापारियों से विवाद हो चुका है।
- गोमती नगर में पत्रकारपुरम, विभूति खंड सहित अन्य प्रमुख इलाकों में कोई सरकारी पार्किंग नहीं है। यहां भी गाड़ियों को उठाने पर विवाद होता रहा है।
- लालबाग में नगर निगम मुख्यालय से लेकर हजरतगंज कोतवाली तक कई होटल और कार सजावट वाली दुकानें हैं। यहां दिन भर सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी होती हैं।
- जिलाधिकारी कार्यालय, स्वास्थ्य भवन, मंडलायुक्त कार्यालय और परिवहन मुख्यालय के बाहर सड़क पर दोनों ओर सुबह से शाम तक गाड़ियां खड़ी रहती हैं। इनको भी हटाना आसान नहीं होगा।
- राजा नवाब अली रोड और कचहरी रोड पर सड़क के दोनों और गाड़ियां खड़ी रहती हैं जिससे जाम भी लगता है। यहां पर भी कार्रवाई आसान नहीं होगी।
- शहर के सबसे प्रमुख बाजार हजरतगंज में ज्यादातर गाड़ियां सड़क पर खड़ी होती हैं, जबकि यहां पर पार्किंग भी है। इसके बाद भी नेता, असफर अपनी गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी करते हैं।