शहरों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास एवं उसके रखरखाव में आड़े रही वित्तीय दिक्कत को म्यूनिसिपल बॉन्ड के जरिये दूर किया जाएगा। इसकी शुरुआत लखनऊ और गाजियाबाद नगर से होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट ने दोनों नगर निगमों के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने और अवस्थापना विकास निधि के लिए क्रेडिट रेटिंग कराने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्रस्ताव के मुताबिक लखनऊ नगर निगम 200 करोड़ और गाजियाबाद नगर निगम 150 करोड़ रुपये मूल्य तक के बॉन्ड जारी कर मार्केट से धनराशि की व्यवस्था कर सकेंगे। प्रदेश में यह व्यवस्था पहली बार लागू की गई है। दोनों निकायों द्वारा एक महीने में बॉन्ड जारी कर दिए जाएंगे। ये बॉन्ड अधिकतम 10 साल तक की अवधि के लिए जारी किए जाएंगे।
प्रमुख सचिव, नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अमृत योजना से जुड़े शहरों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के साथ ही नगर निकायों का मार्केट ओरिएंटेशन बढ़ाने के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने का फैसला किया गया था।
नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा-154 में भी यह प्रावधान है कि कोई भी नगर निकाय, सरकार की अनुमति से बॉन्ड जारी कर सकता है। नियमानुसार ‘ए प्लस’ की क्रेडिट रेटिंग वाले शहर वाले नगर निगम ही म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी कर सकते हैं। इस मानक के आधार पर ही लखनऊ व गाजियाबाद नगर का चयन किया गया है।
बॉन्ड में सेबी की गाइडलाइन का पूरी तरह से होगा पालन
क्रेडिट रेटिंग के लिए भी दो एजेंसियों का चयन किया गया है, जो अन्य शहरों की भी क्रेडिट रेटिंग तैयार करेंगी। दो ट्रांजेक्शन एडवाइजर रखे हैं, जो बॉन्ड जारी करने के संबंध में सेबी की गाइडलाइन का पालन कराएंगे। उन्होंने बताया कि बॉन्ड से जहां संस्थागत निवेशकों की रुचि शहरों के विकास में बढ़ेगी, वहीं शहरों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
लखनऊ में पेयजल-सीवरेज, गाजियाबाद में टीटीपी पर खर्च होगा पैसा
प्रमुख सचिव सिंह ने बताया कि बॉन्ड के जरिए मिलने वाली धनराशि से लखनऊ में पेयजल और सीवरेज सिस्टम की परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा, जबकि गाजियाबाद में टर्सरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) लगाया जाएगा। इस प्लांट में सीवर के पानी को शोधित कर औद्योगिक इकाइयों को बेचा जाएगा।
लखनऊ को बॉन्ड के जरिए उठाई राशि पर मिलेगा 26 करोड़ अनुदान
बॉन्ड के माध्यम से मार्केट से उठाई गई धनराशि पर वैसे तो 8.5 से 9 प्रतिशत तक ब्याज देने का प्रावधान है, लेकिन बॉन्ड के जरिए प्राप्त धनराशि पर केंद्र सरकार की ओर से प्रति 100 करोड़ पर 13 करोड़ रुपये अनुदान दिया जाता है। इसलिए लखनऊ नगर निगम को केंद्र सरकार से 26 करोड़ अनुदान के रूप में मिलेंगे।