हमारे शहर की हवा देश में सबसे ज्यादा ‘जहरीली’ हो चुकी है। सोमवार को लखनऊ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 294 पर पहुंच गया। चिंता की बात यह है कि लखनऊ की हवा में गाजियाबाद और दिल्ली जैसे शहरों से भी अधिक जहर पाया गया है। दिल्ली में एक्यूआई 249 रिकॉर्ड हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के रिकॉर्ड के मुताबिक लखनऊ का एक्यूआई इस मौसम में पहली बार 294 पहुंचा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राजधानी की हवा बहुत खराब की श्रेणी में पहुंच सकती है। अभी 300 से कम एक्यूआई रहने पर यह खराब की श्रेणी में ही बनी रहेगी। रविवार को लखनऊ का एक्यूआई 272 रिकॉर्ड हुआ था। 24 घंटे में ही यह 300 के करीब पहुंच गया है। केवल छह अंक और बढ़ने के बाद शहर की हवा बहुत खराब हो जाएगी। वहीं, अभी ही कुछ इलाकों में एक्यूआई 300 के ऊपर बना हुआ है।
आवासीय इलाकों में गोमतीनगर की हालत बुरी
सीपीसीबी लखनऊ में चार स्टेशनों पर वायु प्रदूषण की ऑनलाइन निगरानी करता है। इसमें आवासीय इलाकों में गोमतीनगर का एक्यूआई सबसे अधिक बना हुआ है। रात नौ तक इसका 24 घंटे का औसत एक्यूआई 311 रिकॉर्ड हुआ है। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों में तालकटोरा में सबसे अधिक हवा प्रदूषित है। यहां एक्यूआई 328 रिकॉर्ड हुआ है।
पीएम 2.5 बिगाड़ रहा हवा की सेहत
सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी की हवा को प्रदूषित करने में सूक्ष्म कण पीएम2.5 जिम्मेदार है। इसके बढ़े होने की वजह निर्माण वाली साइट पर धूल उड़ने, वाहनों के गैस उत्सर्जन और सड़कों पर जमी धूल है। इसे नियंत्रित करने में लखनऊ के अधिकारी फेल हो रहे हैं। इससे पीएम 2.5 का स्तर लखनऊ में बढ़ता ही जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दिन में हवा न चलती तो एक्यूआई सोमवार को ही 300 का आंकड़ा पार कर लेता।
शहर में हवा की ‘सेहत’
इलाका एक्यूआई रंग
तालकटोरा 328 लाल
गोमतीनगर 311 लाल
अलीगंज 254 गहरा पीला
लालबाग 268 गहरा पीला
यूपी में सबसे अधिक प्रदूषण
शहर एक्यूआई
लखनऊ 294
गाजियाबाद 284
मुरादाबाद 272
नोएडा 260
मेरठ 255
देश में सबसे अधिक यहां प्रदूषण
शहर एक्यूआई
लखनऊ 294
गाजियाबाद 284
यमुनानगर 277
मुरादाबाद 272
करनाल 269
मुजफ्फरनगर 266
एक्यूआई को समझें
एक्यूआई रंग हवा पर असर
50 से कम गहरा हरा अच्छी
51 से 100 हरा संतोषजनक
101 से 200 पीला सुधरी हुई
201 से 300 गहरा पीला खराब
301 से 400 लाल बहुत खराब
401 से 500 गहरा लाल खतरनाक
(200 तक एक्यूआई मिलने पर हवा को सांस लेने योग्य माना जाता है। इसके बाद इसमें सांस लेना स्वास्थ्य के लिए खराब हो सकता है। 301 से अधिक एक्यूआई होने पर सांस के मरीजों को खास तौर पर दिक्कत हो सकती है। लंबे समय तक इस एक्यूआई की हवा के संपर्क में रहने पर सांस से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।)