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नहीं पसीजा लविवि, बंद कर दिया एमएससी पर्यावरण विज्ञान का कोर्स, 18 छात्रों ने लिया था दाखिला

Sat, 30 Jan 2021 01:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ विश्वविद्यालय ने एमएससी पर्यावरण विज्ञान में 18 छात्रों को प्रवेश देने के बाद अब कोर्स ही बंद कर दिया है। ऐसे में इस कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों को समझ नहीं आ रहा है कि वे कहां जाएं। कई छात्रों ने तो यहां दाखिले के लिए अन्य संस्थानों में अपनी सीट छोड़ दी है।

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गौरतलब है कि छात्रों ने 23 दिसंबर को पर्यावरण विज्ञान कोर्स की फीस जमा कराई थी। बीते छात्रों को बीते 18 जनवरी को कोर्स बंद होने की सूचना मिली। इसके बाद अभ्यर्थियों ने लविवि को प्रार्थना पत्र दिया था। इस मामले में बैठक करके फैसला करने की बात कहने के बाद लविवि प्रशासन ने शुक्रवार को आखिरकार कोर्स संचालन से हाथ खड़े कर दिए। लविवि के मुताबिक कुछ विद्यार्थियों ने फीस वापस लेने का विकल्प चुना है और कुछ ने अन्य पाठ्यक्रम में ट्रांसफर ले लिया है।

लविवि प्रशासन का कहना है कि नियमों के अनुसार स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम संचालित होने के लिए 60 फीसदी सीट भरनी जरूरी हैं। कोर्स में इस साल 40 सीट पर आवेदन मांगे गए थे, इस हिसाब से 24 सीट पर दाखिले होने पर पाठ्यक्रम का संचालन होना था, लेकिन 18 विद्यार्थियों ने ही फीस जमा कराई थी। वहीं छात्रों ने सवाल उठाया है कि लविवि ने इस बात की सूचना ही नहीं दी कि पाठ्यक्रम में 60 फीसदी सीटें नहीं भरी हैं। इसके बजाय उनको फीस जमा करने को कहा गया।
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प्रवक्ता बोले - पांच अभ्यर्थियों ने प्लांट साइंस में लिया ट्रांसफर
लविवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि एमएससी प्लांट साइंस और एमएससी पर्यावरण विज्ञान के पाठ्यक्रमों में शुल्क जमा करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या इन स्ववित्तपोषित कार्यक्रमों को चलाने के लिए जरूरी न्यूनतम छात्रों की संख्या से कम था। पर्यावरण विज्ञान के अभ्यर्थियों को प्लांट साइंस में ट्रांसफर करने का विकल्प दिया गया है। पांच अभ्यर्थियों ने प्लांट साइंस में ट्रांसफर ले लिया है और शेष छात्रों ने फीस वापसी का विकल्प चुना है। रिफंड चुनने वाले छात्रों का ब्योरा रिफंड के लिए अकाउंट ऑफिस भेज दिया गया है।

लेकिन इन सवालों के नहीं हैं जवाब
- लविवि को अगर कोर्स नहीं चलाना था फिर उनका डाटा परीक्षा विभाग को परीक्षा फॉर्म भरने के लिए क्यों उपलब्ध कराया गया।
-अगर यह गलती हुई है तो फिर दोषी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
-सेल्फ फाइनेंस आधारित ऐसे पाठ्यक्रमों का पिछले साल रिकॉर्ड क्योें नहीं जारी किया जाता, जिनका संचालन 60 फीसदी से कम दाखिले पर नहीं किया जाता है।

विवि की लापरवाही से छात्रों का साल बर्बाद
एमएससी एनवायरमेंटल साइंस के छात्रों का एक साल लविवि की लापरवाही से बर्बाद होगा। दोषियों पर कार्रवाई के बजाय विवि प्रशासन मामले से अपना पल्ला झाड़ रहा है। वहीं छात्रों की मांगों को दबाने के लिए छात्र संघ चुनाव भी नहीं कराया जा रहा है। - महेंद्र सिंह यादव, छात्र नेता, समाजवादी छात्रसंघ

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