लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के विभागों में आपसी तालमेल न होने का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। विवि की पूरी प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन है। फीस भी ऑनलाइन जमा की जाती है। प्रवेश और परीक्षा विभाग के बीच तालमेल और डाटा लिंक न होने की वजह से विद्यार्थियों को हर सेमेस्टर के बाद परीक्षा फॉर्म भरना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जबकि विवि ने पिछले साल यूनिवर्सिटी डाटा रिसोर्स सेंटर (यूडीआरसी) की शुरुआत करते समय दावा किया था कि विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म भरने से मुक्ति मिल जाएगी। एक सेमेस्टर तक इसका लाभ भी मिला, लेकिन अब फिर से वही स्थिति हो गई है।
लविवि ने पिछले साल यूडीआरसी पोर्टल की शुरुआत की है। इसमें स्नातक और परास्नातक प्रथम वर्ष के सभी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के डाटा रिसोर्स सेंटर पर अनिवार्य रूप से लॉगइन करने के लिए कहा गया। लॉगइन करने के बाद प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म नहीं भरना पड़ा। पहले साल यह व्यवस्था प्रथम वर्ष के आठ हजार विद्यार्थियों के लिए थी। दावा था कि अगले साल यह व्यवस्था सभी विद्यार्थियों के लिए लागू होगी। इस साल सभी विद्यार्थियों की तो दूर पिछले साल सुविधा का लाभ उठाने वाले विद्यार्थियों को अब परीक्षा फॉर्म भरने को कहा जा रहा है।
अलग-अलग पोर्टल के लिए हो रहा भुगतान
लविवि में इस समय कई पोर्टल हैं। इन सबके लिए अलग-अलग भुगतान भी किया जा रहा है। इस समय प्रवेश और परीक्षा के लिए अलग-अलग पोर्टल हैं। परीक्षा फॉर्म भरने के बाद रिजल्ट भी परीक्षा विभाग की ओर से ही जारी किया जाता है। इसलिए पास और फेल होने वाले सभी विद्यार्थियों का डाटा परीक्षा विभाग के पास होता है। ऐसे में संबंधित विभागाध्यक्ष से फॉरवर्ड कराने के बाद विद्यार्थियों से दोबारा परीक्षा फॉर्म भरवाने का कोई औचित्य नहीं है। इसके बावजूद विद्यार्थियों को हर बार परीक्षा भरने के लिए सायबर कैफे के चक्कर लगाने पड़ते हैं। औपचारिकता यहीं पर पूरी नहीं होती। परीक्षा फॉर्म भरने के बाद उन्हें इसका प्रिंट आउट भी जमा करना होता। ऐसे में ऑनलाइन का कोई मतलब ही नहीं है।
बातचीत कर कमी दूर कराएंगे
यूडीआरसी पोर्टल का मकसद विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म भरने से मुक्ति देना था। इस बार किन्हीं कारणों से ऐसा नहीं हो पा रहा है। सोमवार को कार्यालय खुलने पर विभागों से बातचीत करके कमी को दूर कराया जाएगा।
- प्रो.एनके पांडेय
प्रवक्ता, लविवि